Tuesday, 8 September 2020

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ने वेबिनार आयोजित किया

जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ने आज प्रमुख कार्यक्रम जल जीवन मिशन के आउटपुट एवं परिणामों के योजना निर्माण, कार्यान्वयन एवं निगरानी पर एक वेबिनार आयोजित किया। इस वेबिनार में विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभागों/ ग्रामीण जलापूर्ति विभागों के लगभग 2,500 राज्य, जिला एवं प्रखंड अधिकारियों ने भाग लिया।

जल जीवन मिशन का कार्यान्वयन राज्यों के साथ साझीदारी के तहत हो रहा है जिसका लक्ष्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में एवं किफायती सेवा प्रदायगी प्रभारों के साथ नियमित एवं दीर्घकालिक आधार पर अनुशंसित गुणवत्ता वाला आश्वस्त पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है जिससे कि उनके जीवन स्तर में सुधार आ सके। इस मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में प्रत्येक घर को जलापूर्ति सुनिश्चित करना एवं दीर्घकालिक आधार पर जलापूर्ति प्रणालियों की कार्यात्मकता पर फोकस करना, विकेंद्रित प्रचालन एवं प्रबंधन व्यवस्थाएं तथा स्थानीय समुदाय द्वारा जल गुणवत्ता निगरानी सुनिश्चित करना शामिल है।

आज आयोजित वेबिनार ने जल जीवन मिशन के विजन एवं प्रकृति का वर्णन करने के लिए लघु ऑडियो-विजुअल क्लिपों एवं पावर प्वांइट प्रजेनटेशन का उपयोग किया। मुख्य भाषण राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक श्री भरत लाल द्वारा दिया गया जिन्होंने इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के सार तत्व की व्याख्या की जिसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रोंमें रहने वाले लोगों के जीवन में सुधार लाना है।

श्री लाल ने उल्लेख किया कि ‘यह कार्यक्रम पहले के कार्यक्रमों से अलग है और इसके लिए नवोन्मेषण एवं केंद्रित दृष्टिकोण अपेक्षित है‘ और उसके बाद उन्होंने मिशन की मुख्य विशेषताओं पर जोर दिया और इसके जरिये विभिन्न हितधारकों की जिम्मेदारियों पर बल दिया। मंत्रालय के पदाधिकारियों ने मिशन के लक्ष्यों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। नोट किया गया कि देश में लगभग 5.35 करोड़ ग्रामीण परिवार हैं जिन्हें नल जल कनेक्शन उपलब्ध है और 47,00 गांवों, 351विकासखंडों एवं 9 जिलों में शत प्रतिशत नल कनेक्शन हैं। पूरे देश में, 2 करोड़ से अधिक परिवारों को पिछले एक साल के दौरान अर्थात 15 अगस्त, 2019 को मिशन के लांच किए जाने के बाद से, नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। एक लाख से अधिक परिवारों को प्रति दिन के आधार पर नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराये जाते हैं। जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे कार्य की गति और परिमाण पर विस्तार से चर्चा की गई। वर्तमान में 28 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को पाइप युक्त जलापूर्ति की जा रही है जिससे न केवल ग्रामीण महिलाओं की कठिन स्थिति में कमी आई है बल्कि उनकी सुरक्षा और मर्यादा भी आश्वस्त हुई है।

जहां सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश 100 प्रतिशत एफएचटीसी स्थिति अर्जित करने के लिए एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, बिहार, गोवा, तेलंगाना और पुदुचेरी 2021 तक ही इस लक्ष्य को पूरा करने वाले अग्रिम पंक्ति के राज्यों में उभर कर सामने आ रहे है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एक दूसरे से आगे निकल जाने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर चर्चा की गई। प्रस्तुति में विभिन्न मुद्दों, चुनौतियों एवं मिशन के लिए अवसरों की भी चर्चा की गई।

जैसीकिमिशन में परिकल्पना की गई है, स्थानीय ग्रामीण समुदाय/ग्राम पंचायत एवं इसकी उप समिति अर्थात ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति/पानी समिति को गांवों में जलापूर्ति प्रणालियों के योजना निर्माण, कार्यान्वयन, प्रबंधन, प्रचालन तथा रखरखाव में भागीदार बनाया जाना है जिससे पीने के पानी सुरक्षा को अर्जित करने के वर्तमान में जारी प्रयासों की दीर्घकालिक संधारणीयता सुनिश्चित की जा सके। ग्राम कार्य योजना, जिला कार्य योजना एवं राज्य कार्य योजना के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। रेट्रोफिटिंग एवं विद्यमान पाइप युक्त जलापूर्ति प्रणाली (पीडब्ल्यूएस) प्रणालियों के संवर्धन को रेखांकित किया गया और राज्यों से अभियान मोड में ऐसे सभी गावों में कार्य आरंभ करने को कहा गया जिससे कि गांवों एवं छोटी बस्तियों में रहने वाले निर्धनों एवं सीमांत लोगों के शेष रह गए परिवारों को जल्द से जल्द से नल जल प्राप्त हो सके। पदाधिकारियों को आकांक्षी जिलों, जल गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों, सूखा एवं रेगिस्तान प्रभावित क्षेत्रों, अनुसूचित जाति/जनजाति बहुत क्षेत्रों, संसद आदर्श ग्रामीण योजना गांवों आदि जैसे प्राथमिकता क्षेत्रों पर फोकस करने को कहा गया।

यह भी रेखांकित किया गया कि प्रत्येक स्रोत की जल गुणवत्ता निगरानी के एक हिस्से के रूप में वर्ष में एक बार रसायनिक मानकों पर तथा दो बार बैक्टीरिया जनित संदूषण के लिए जांच की जानी चाहिए। राज्यों को इसी के अनुरूप, सभी जल स्रोतों की जांच करने को कहा गया। राज्य में सभी प्रयोगशालाओं के लिए एनएबीएल प्रत्यायन को अपग्रेड करने एवं प्राप्त करने की आवश्यकता है। 2020-21 के दौरान प्रयोगशालाओं की अधिकतम संभव संख्या के लिए एनएबीएल प्रत्यायन प्राप्त करने की योजना बनाने का आग्रह किया गया। आम लोगों के लिए जल गुणवत्ता प्रयोगशाला सुविधाएं खोलने को भी कहा गया।

पीने का पानी एवं स्वच्छता विभाग के पास एक मजबूत समेकित प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएमआईएस) है। इस पर विस्तार से चर्चा की गई कि किस प्रकार जेजेएम- आईएमआईएस योजना निर्माण एवं निगरानी के लिए एक बेहतर माध्यम के रूप में उभर सकता है। यह भी उल्लेख किया गया कि आईएमआईएस फिजूल के व्यय से बचने में सहायक हो सकता है और जल सेवा प्रदायगी के मापन एवं निगरानी में उपयोगी हो सकता है। इसके अतिरिक्त, जलापूर्ति प्रणाली के मापन एवं निगरानी में आईओटी आधारित सेंसरों की प्रासंगिकता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। लोक शिकायत निपटान प्रणाली के महत्व एवं तौर तरीकों को रेखांकित किया गया। केरल, गुजरात एवं ओडिशा जैसे कुछ राज्य पहले से ही ‘1916’हेल्पलाइन का उपयोग कर रहे हैं, अन्य राज्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति से संबंधित विभिन्न लोक शिकायतों का समाधान करने के लिए ऐसे तंत्र अपनाने का आग्रह किया गया।

सौजन्य से: pib.gov.in

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