Tuesday, 8 September 2020

तीसरे राष्ट्रीय पोषण माह के उत्सव के भाग के रूप में पहले 1,000 दिनों की अवधि में बच्चों और माताओं के लिए पोषण अभियान और पोषक तत्वों की आवश्यकता की सर्वोत्तम प्रथाओं और सफलता की कहानियों पर वेबिनार का आयोजन

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने सभी लोगों से अपील की कि वे स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए जन भागीदारी को बढ़ावा दें

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार, सितंबर 2020में मनाए जा रहे तीसरे पोषण माह के दौरान वेबिनार की एक श्रृंखला का आयोजन कर रहा है। 7सितंबर को पोषण अभियान की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं और सफलता की कहानियों पर पहले वेबिनार का आयोजन किया गया। आज दूसरे वेबिनार का आयोजन पहले 1,000दिनों की अवधि में बच्चों और माताओं के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता के विषय पर किया गया।इन वेबिनारों की अध्यक्षता केंद्रीय महिला एवं बाल विकास एवं कपड़ा मंत्री, श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी कर रही हैं। इस वेबिनार में श्रीमती देबश्री चौधरी, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार, महिला एवं बाल विकास सचिव, श्री राम मोहन मिश्र, साझेदार मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और विकास भागीदारों के प्रतिनिधि, पीआरआई सदस्य, आईसीडीएस पदाधिकारी, राज्य महिला एवं बाल विकास प्रतिनिधि, डोमेन विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ, मंत्रालय के अधिकारी और अन्य लोग शामिल हुए।

वेबिनार को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने समन्वित मंत्रालयों के प्रयासों की सराहना की और पोषण अभियान को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सभी लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एक ई-पुस्तक में सर्वोत्तम प्रथाओं और सफलता की कहानियों को संकलित करने की योजना बना रहा है।

कल आयोजित हुए वेबिनार के विषयगत एजेंडे में, पोषण अभियान की सर्वोत्तम प्रथाओं और सफलता की कहानियों के साथ-साथ कोविड-19के दौरान पोषण के लिए नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता, पोषण में नवाचार और कृषि विविधता की आवश्यकता, लक्षद्वीप आंगनबाड़ी केंद्रों में न्यूट्री-गार्डन स्थापित करने जैसी सर्वोत्तम प्रथाओं और सफलता की कहानियों को साझा करने, गुजरात में गंभीर रूप से कुपोषित (एसएएम) बच्चों को ऑनलाइन ट्रैकिंग करने और गोद लेने पर चर्चाएं शामिल की गई थी। ओडिशा में बाजरा का वितरण और समावेशन को दुरुस्त करना, उत्तराखंड में सरकारी अधिकारियों द्वारा गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को गोद लेना और दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेशों में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए पहचान अभियान, जिसमें मुख्य रूप से जनजातीय आबादी शामिल हैं जिनके बच्चों में कुपोषण की व्यापकता उच्च स्तर पर है। 

आज के वेबिनार के एजेंडे के रूप में दो प्रतिष्ठित चिकित्सा पेशेवरों द्वारा दिए गए अतिथि व्याख्यान शामिल थे। पहला व्याख्यान "पोषण अपनाएं: पहला 1,000 दिन बहुत महत्वपूर्म" शीर्षक से डॉ एच.पी.एस. सचदेव, बाल रोग और नैदानिक ​​महामारी विज्ञान के प्रोफेसर द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने जोर देकर कहा कि गर्भाधान के समय से लेकर दो वर्ष की उम्र तक पोषण, अच्छे जीवन की शुरुआत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। "बच्चों और माताओं के लिए पोषक आवश्यकताएं: पहले 1,000 दिन" शीर्षक के दूसरे व्याख्यान में, प्रोफेसर एवी कुर्पद, सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज में फिजियोलॉजी के पूर्व प्रमुख, ने सलाह दिया कि सामान्य, सस्ते, घर में पके हुए विविध आहार,पोषण की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और आहार को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाना चाहिए जिससे अंडर-या ओवर-फीडिंग दोनों के जोखिमों से बचा जा सके।उन्होंने नवजात के जन्म के बाद पहले 180 दिनों के लिए स्तनपान पर विशेष बल दिया।

सौजन्य से: pib.gov.in

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