Monday, 12 October 2020

श्री गंगवार ने ब्रिक्स देशों के मंत्रीस्तरीय शिखर सम्मेलन को संबोधित किया;कार्यस्थल पर सुरक्षा तंत्र तैयार करने का आह्वान किया

श्री गंगवार ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में श्रमशक्ति के भविष्य के मुद्दों एवं चुनौतियों के व्यावहारिक और स्थायी समाधान खोजने के लिए ब्रिक्स देशों को मिलकर काम करने को कहा

श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष गंगवार ने विशेष रूप से ब्रिक्स देशों से श्रमिकों तथा नियोक्ता के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में उपयुक्त वैश्विक कार्रवाई करने का आह्वान किया है ताकि विकास और अधिक रोजगार एवं व्यापक श्रम कल्याण को संभव बनाया जा सके।

श्री गंगवार ने शुक्रवार 10 अक्टूबर, 2020 को ब्रिक्स देशों की मंत्रीस्तरीय सम्मेलन की आभासी बैठक में बोलते हुए कहा कि श्रमिकों की भलाई के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और बेहतर कामकाजी परिस्थितियां जरुरी हैं। उन्होंने कहा कि देश में एक स्वस्थ श्रमशक्ति अधिक उत्पादक होगी और आर्थिक विकास में योगदान देगी।

ब्रिक्स देशों के श्रम और रोजगार मंत्रियों की यह आभासी बैठक ब्रिक्स देशों में एक सुरक्षित कार्य संस्कृति बनाने के दृष्टिकोण सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए रूसकी अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक श्री गाय राइडर, श्रमिकों और नियोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

केन्द्रीय मंत्री ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि कोविड -19 के प्रभाव को कम करने के लिए पेशेगत सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी उपायों से जुड़े पहलुओं का भी महत्व बढ़ा है।

श्री गंगवार ने सम्मेलन को सूचित किया कि कार्यस्थल पर पेशेगत सुरक्षा और स्वास्थ्य का एक गतिशील एवं प्रभावी ढांचा प्रदान करने के लिए भारत की संसद ने हाल ही में पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कामकाज की स्थितियां, 2020 पर एक कानून पारित की है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इसने सभी क्षेत्रों के लिए कानूनी प्रावधानों का विस्तार किया है। उन्होंने आगे कहा, "इन महत्वपूर्ण पहलों में कर्मचारियों के लिए अनिवार्य वार्षिक स्वास्थ्य जांच; एक त्रिपक्षीय बोर्ड द्वारा बदलती प्रौद्योगिकी के अनुरूप गतिशील स्वास्थ्य मानकों का निर्धारण; महिलाओं को उनकी सहमति से और कड़े सुरक्षा उपायों के साथ रात की पाली में भी सभी प्रतिष्ठानों में काम करने की अनुमति प्रदान करना; कानून के तहत पीड़ित को मुआवजे के अलावा नियोक्ता पर लगाए गए न्यूनतम 50 प्रतिशत जुर्माने के भुगतान और सुरक्षा प्रावधानों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए तीसरे पक्ष द्वारा ऑडिट की अनुमति प्रदान करना शामिल है।” उन्होंने कहा कि इस कानून में प्रतिष्ठान, कार्यस्थल पर जोखिम और पेशेगत रोगों से जुड़े एक केंद्रीकृत डेटा बेस तैयार करने का प्रावधान किया गया है।

भारत के नए कानूनों में श्रमिकों एवं नियोक्ताओं की सुरक्षा समितियों समेत सुरक्षा के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताते हुए, श्री गंगवार ने ब्रिक्स देशों से विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर इन तंत्रों को तैयार करने का आह्वान किया।

इस बात पर बल दिया जाना चाहिए कि कामकाज का सुरक्षित वातावरण और स्वस्थ श्रमशक्ति काएक महत्वपूर्ण घटक सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा कवरेज की उपलब्धता है, जो आकस्मिकताओं के समय में वित्तीय सहायता प्रदान करे। इस संदर्भ में, हाल ही में लागू सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हमारे श्रम कानून ने देश के संपूर्ण 500 मिलियन श्रमशक्ति को सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की एक रूपरेखा प्रदान की है। असंगठित श्रमिकों, प्रवासी श्रमिकों, स्वरोजगार करने वालों और गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिक के तौर पर रोजगार के नए रूपों से जुड़े लोगों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने के लिए योजनाओं की रूपरेखा बनाने की विशेष पहल की गई है।

सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के माध्यम से गरीबी कम करने के बारे में एक अन्य सत्र को संबोधित करते हुए श्री गंगवार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार गरीबी को मिटाने और बदलती दुनिया में समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने वित्तीय समावेशन, सबसे कमजोर नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान करके गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने, 80 मिलियन आर्थिक रूप से कमजोर घरों को सब्सिडी युक्त खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन प्रदान करने, सभी के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित आवास, लगभग 26 मिलियन गैर-विद्युतीकृत घरों में मुफ्त बिजली, 5.5 मिलियन घरों में पीने योग्य पानी की आपूर्ति और 106 मिलियन से अधिक घरेलू शौचालयों के निर्माण के माध्यम से बुनियादी स्वच्छता सुनिश्चित करने जैसे अधिकांश बुनियादी सेवाओं को कवर करते हुए गरीबी खत्म करने की एक बहुआयामी रणनीति अपनाने का हवाला दिया। श्री गंगवार ने कहा कि इन उपायों के अलावा किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना भी लागू की गई है, जिससे लगभग 111.7 मिलियन किसान लाभान्वित हुए हैं।

उन्होंने जरूरतमंद लोगों को रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की कई योजनाओं का भी जिक्र किया। इनमें राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार के अवसरों को बेहतर करने के उद्देश्य से शुरू की गई राष्ट्रीय आजीविका मिशन शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा, “लघु एवं सूक्ष्म व्यापार उद्यमों और व्यक्तियों को गिरवी से मुक्त ऋण के विस्तार के जरिए स्व-रोजगार की सुविधा दी गई है।”

श्री गंगवार ने यह भी कहा कि कोविड -19 महामारी दुनिया के लिए नई चुनौतियां लेकर आई है। लिहाजा गरीबी से निपटने की दिशा में हमारे प्रयासों को एक फिर से संयोजित करने की जरुरत है। उन्होंने ने बताया कि भारत ने कोविड -19 संकट के प्रतिकूल प्रभाव से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए "आत्मनिर्भर भारत अभियान" के तहत राहत के कई उपाय किये हैं। इन उपायों में अपने परिचालन संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए एक क्रेडिट लाइन खोलना, श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा योगदानों को सब्सिडी देना, श्रमिकों को बेरोजगारी की स्थिति में सहयोग प्रदान करना, भवन निर्माण में लगे श्रमिकों को वित्तीय सहायता देना, लगभग 5 मिलियन फुटपाथ विक्रेताओं को गिरवी मुक्त कार्यशील पूंजी ऋण मुहैया कराना, मिशन मोड में रोजगार प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार - सह - ग्रामीण सार्वजनिक कार्य के एक अभियान की शुरुआत शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत गरीबी अनुपात को कम करने के लिए सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (एमडीजी) को हासिल करने वाले शुरुआती देशों में से एक है और वह गरीबी को मिटाने के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है। श्री गंगवार ने जोर देकर कहा, “समावेशी आर्थिक विकास में तेजी लाने के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, दोनों, के लिए राष्ट्रीय विकास के एजेंडे में गरीबी उन्मूलन सबसे ऊपर है।”

गरीबी के एक जटिल समस्या होने और इसकी जड़ें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों, क्षेत्रों में होने के तथ्य का उल्लेख करते हुए, उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि इस एजेंडे को मंत्रियों की घोषणा में शामिल किया गया है क्योंकि यह "वर्तमान वैश्विक संदर्भ में” विशेष रूप से सामयिक और प्रासंगिक है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण है की ब्रिक्स देश गरीबी का मुकाबला करने के लिए ठोस नीतिगत कार्रवाइयों को तय करने के लिए मिलकर काम करें।

'एक डिजिटल अर्थव्यवस्था में श्रम का भविष्य' विषय वाले सत्र में हस्तक्षेप करते हुए, श्री गंगवार ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स जैसे डिजिटलीकरण और तकनीकी प्रगति तेजी से हमारे जीवन और कार्य को दोबारा से आकार दे रहे हैं।इन सभी बदलावों का श्रम बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ा है।उन्होंने कहा किकोविड -19 की वजह से दुनिया अलगाव में चली गई है। केन्द्रीय मंत्री ने जोर देकर कहाकि ऐसी स्थिति में डिजिटलीकरण ही सरकारों, व्यक्तियों और व्यवसायों को बदलते परिदृश्य का सामना करने का अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने बताया कि डिजिटलीकरण की दिशा में अर्थव्यवस्था के बढ़ने,जिसकी शुरुआत पहले ही हो चुकीथी, की गति कोवर्तमान घटनाओं ने तेज कर दिया है। अब डिजिटल अर्थव्यवस्था नए सामान्य का एक अभिन्न अंग है। टेलीवर्क, टेलीमेडिसिन, खाद्य सामग्री की डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स, ऑनलाइन एवं संपर्क रहित भुगतान, दूरस्थ शिक्षा एवं मनोरंजन जैसे तकनीकी नवाचार हमारी ज़िन्दगी में शामिल हो चुके हैं। श्री गंगवार ने आगे कहा, “भारत एक मजबूत एवं विश्वसनीय डिजिटल बुनियादी ढांचे और पहुंच के साथ वैश्विक तथा स्थानीय व्यवसायों के लिए एक आकर्षक अवसर पेश करता है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है।”

डिजिटल अर्थव्यवस्था द्वारा गिगएवं प्लेटफ़ॉर्म कार्य जैसे काम के नए रूप पैदा करने का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि इससे नए प्रकार के रोज़गार संबंध बन गए हैं, जहां एक श्रमिक कई नियोक्ताओं के साथ जुड़ा हुआ है, जिससे सामाजिक सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी लाभों के प्रावधानों में जटिलता आ रही है।

उन्होंने यह जानकारी दी कि सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नया भारतीय कानून एग्रीगेटर, गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर जैसे शब्दों को परिभाषित करके काम के इन उभरते हुए रूपों को पहचान करता हैऔर एक अलग सामाजिक सुरक्षा कोष, जिसमें एग्रीगेटरों का योगदान जमा होगा, के माध्यम से ऐसे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी उन्नति और डिजिटलीकरण अनुपालन तंत्र को आसान बनाने और श्रम कानूनों के कार्यान्वयन में भी मदद करतेहैं। श्रम बाजार प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिएहमने ऑनलाइन निरीक्षण और औद्योगिक विवादों के निपटारे की एक प्रणालीकी शुरुआत की है। श्री गंगवार ने कहा, “ये सारे कदम श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा मेंतकनीक के सफल उपयोग का संकेत देते हैं।”

उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए अपनी श्रमशक्ति को तैयार करते हुए हमें सतत विकास लक्ष्य - 8, जो सतत समावेशी एवं निरंतर आर्थिक विकास, पूर्ण एवं उत्पादक रोजगार और सभी के लिए पर्याप्त रोजगार को बढ़ावा देता है, पर से नजरें नहीं हटानी चाहिए। कार्य के समावेशी भविष्य से संबंधित हमारे दृष्टिकोण में श्रम बाजार तक समान पहुंच, समान काम के लिए समान वेतन, समाज के सभी वर्गों द्वारा समान भागीदारी और सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जैसे तत्व शामिल हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था रोजगार की दुनिया को बदल रही है और इसलिए ब्रिक्स नेटवर्क रिसर्च इंस्टीट्यूट्स द्वारा किये जाने वाले नियमित अध्ययन से हमें रोजगार के भविष्य के पहलुओं और पूरक नीति निर्माण के बारे में अपनी समझ बेहतर करने में मदद मिलेगी। अपनी बात का समापन करते हुए उन्होंने कहा, “हम सभी को डिजिटल अर्थव्यवस्था में श्रमशक्ति के भविष्य के मुद्दों और चुनौतियों के लिए संभावितएवं स्थायी समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करने की जरुरत है ताकि हम अपने मौलिक अधिकारों से समझौता किए बिना अपने कर्मचारियों के लिए रोजगार के लचीले अवसर हासिल कर सकें।”

सौजन्य से: pib.gov.in

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