Friday, 28 February 2020

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह में 21 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए

शिक्षा तथा अनुसंधान संस्थानों में लैंगिक विकास तथा समानता के लिए तीन प्रमुख कार्यक्रमों की घोषणा की

नेशनल साइंस फाउंडेशन (अमेरिका) की हाल की रिपोर्ट के अनुसार भारत विज्ञान, इंजीनियरिंग प्रकाशनों में तीसरे स्थान पर पहुंचा

विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी मंत्री ने वैज्ञानिकों से 21वीं शताब्दी की चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान ढूंढ़ने के लिए राष्ट्रीय प्रयास में शामिल होने का आग्रह किया

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने देश के वैज्ञानिक उद्यम की गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे विज्ञान को लोगों के विकास और भलाई के लिए काम करना चाहिए। आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने शिक्षा तथा अनुसंधान संस्थानों में लैंगिक विकास और समानता के लिए तीन प्रमुख कार्यक्रमों की घोषणा की।

इस वर्ष के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का विषय है “विज्ञान में महिलाएं”

विज्ञान ज्योति कार्यक्रम हाईस्कूल में पढ़ने वाली मेधावी लड़कियों को उच्च शिक्षा में विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग तथा गणित (एसटीईएम) की पढ़ाई जारी रखने में बराबरी का अवसर प्रदान करेगा। संस्थानों को बदलने के लिए लैंगिक विकास (जीएटीआई) से विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग तथा गणित (एसटीईएम) में लैंगिक समानता के मूल्यांकन के लिए विस्तृत चार्टर और रूपरेखा विकसित करेगा। महिलाओं के लिए विज्ञान तथा टेक्नोलॉजी समाधानों का ऑनलाइन पोर्टल महिला विशेष सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों, फेलोशिप तथा केरियर काउंसलिंग से संबंधित ई-संसाधन उपलब्ध कराएगा। इसमें साइंस टेक्नोलॉजी में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का विवरण होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का मुख्य उद्देश्य विज्ञान के महत्व के संदेश को फैलाना है। उन्होंने कहा कि इसके दो पहलू हैं। पहला, शुद्ध ज्ञान की चाह के रूप में स्वयं में विज्ञान तथा जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उपाय के रूप में समाज में विज्ञान। उन्होंने कहा कि दोनों आपस में जुड़े हुए हैं।

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने विज्ञान संचार और लोकप्रियता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इन पुरस्कारों में मेधावी महिला वैज्ञानिकों के लिए महिला उत्कृष्टता पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कारों में राष्ट्रीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी पुरस्कार, स्पष्ट अनुसंधान के लिए लेखन कौशल को सशक्त बनाने (एडब्ल्यूएसएआर) का पुरस्कार, केसीआरबी महिला उत्कृष्टता पुरस्कार और सामाजिक लाभ के लिए टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन के माध्यम से उत्कृष्टता प्रदर्शन के लिए महिला पुरस्कार शामिल हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने विज्ञान दिवस के विषय “विज्ञान में महिलाएं” की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान में लैंगिक समानता की संस्कृति बनाने के लिए हमें सांकेतिक प्रयासों से संपूर्णता की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेशनल साइंस फाउंडेशन (अमेरिका) की हाल की रिपोर्ट के अनुसार भारत विज्ञान और इंजीनियरिंग प्रकाशनों में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है।

ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) फरीदाबाद के कार्यकारी निदेशक प्रो. गगनदीप कांग ने विशेष व्याख्यान दिया। प्रो. कांग भारत की प्रथम महिला एफआरएस हैं।

इस अवसर पर सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन, डीबीटी की सचिव डॉ. रेणू स्वरूप, सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर मान्दे उपस्थित थे।




सौजन्य से: pib.gov.in

प्रधानमंत्री 29 फरवरी, 2020 को 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को लॉन्च करेंगे

सभी प्रधानमंत्री किसान लाभार्थियों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान करने का अभियान

प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में पीएम-किसान के एक साल पूरे होने के आयोजन में हिस्सा लेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 29 फरवरी, 2020 को चित्रकूट में देशभर में 10,000 किसान उत्पादक संगठनों को लॉन्च करेंगे।

छोटे और सीमांत किसानों की संख्या लगभग 86 प्रतिशत हैं, जिनके पास देश में 1.1 हेक्टेयर से कम औसत खेती है। इन छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को कृषि उत्पादन के दौरान भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रौद्योगिकी, बेहतर बीज, उर्वरक, कीटनाशक और समुचित वित्त की समस्याएं शामिल हैं। इन किसानों को अपनी आर्थिक कमजोरी के कारण अपने उत्पादों के विपणन की चुनौती का भी सामना करना पड़ता है।

एफपीओ से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के सामूहीकरण में सहायता होगी, ताकि इन मुद्दों से निपटने में किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ सकें। एफपीओ के सदस्य संगठन के तहत अपनी गतिविधियों का प्रबंधन कर सकेंगे, ताकि प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच हो सके और उनकी आजीविका तेजी से बढ़ सके।

पीएम-किसान के एक साल पूरे

इस अवसर पर पीएम-किसान योजना के लॉन्च होने का एक वर्ष पूरा हो जाने के मद्देनजर आयोजन भी किया जाएगा।

मोदी सरकार ने किसानों के आय समर्थन के रूप में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को लॉन्च किया था, ताकि किसानों को कृषि, संबंधित गतिविधियों और घरेलू आवश्यकताओं के खर्च वहन करने में सहायता हो सके।

योजना के तहत हर योग्य लाभार्थी को प्रति वर्ष 6000 रुपये की धनराशि दी जाती है। यह धनराशि दो-दो हजार रुपये के रूप में तीन बार चार माह की किस्तों में दी जाती है। यह भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के तहत योग्य लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ऑनलाइन भेजी जाती है।

योजना 24 फरवरी, 2019 को लॉन्च की गई थी और उसने 24 फरवरी, 2020 को सफलतापूर्वक अपना एक साल पूरा कर लिया है।

अपनी पहली कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत मोदी 2.0 सरकार ने सभी किसानों को पीएम-किसान योजना का लाभ देने का निर्णय किया था।

पीएम-किसान लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान करने का विशेष अभियान

प्रधानमंत्री 29 फरवरी, 2020 को पीएम-किसान योजना के तहत सभी लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के वितरण का अभियान लॉन्च करेंगे।

पीएम-किसान योजना के तहत लगभग 8.5 करोड़ लाभार्थियों मे से 6.5 करोड़ से अधिक किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड हैं।

इस अभियान से यह सुनिश्चित होगा कि लगभग दो करोड़ पीएम-किसान लाभार्थियों को भी किसान क्रेडिट कार्ड वितरित कर दिए जाए।

सभी पीएम-किसान लाभार्थियों को रियायती संस्थागत ऋण तक पहुंच प्रदान करने के लिए 12 फरवरी से 26 फरवरी तक 15 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत एक पन्ने के साधारण फॉर्म को भरा जाता है, जिसमें बैंक खाता नंबर, खेत रिकॉर्ड का विवरण जैसी बुनियादी जानकारी शामिल हैं। इसमें किसानों को यह घोषणा करनी है कि मौजूदा समय में वह किसी भी अन्य बैंक खाते से केसीसी का लाभार्थी नहीं है।

जिन पीएम-किसान लाभार्थियों के आवेदन 26 फरवरी तक प्राप्त हो गए है, उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड देने के लिए 29 फरवरी को बैंक शाखाओं में बुलाया जाएगा।

सौजन्य से: pib.gov.in

प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर वैज्ञानिकों को बधाई दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने अपने बधाई संदेश में कहा, ‘‘राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस हमारे वैज्ञानिकों की प्रतिभा और दृढ़ता का अभिवादन करने का अवसर है। अविष्‍कार करने के उनके जोश और पथप्रदर्शक अनुसंधान ने भारत और दुनिया की सहायता की है। मेरी कामना है कि भारतीय वैज्ञानिक लगातार कामयाब होते रहें और हमारे युवा मस्तिष्‍क विज्ञान के प्रति अधिक जिज्ञासा रखें। 

भारत में अनुसंधान और नई खोजों के लिए बेहतर माहौल बनाने के लिए हमारी तरफ से, सरकार अनेक प्रयास कर रही है। इस वर्ष के शुरू में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के दौरान मैंने विज्ञान से जुड़े पहलुओं की चर्चा की थी। उन्‍हें मैं फिर साझा कर रहा हूं।’’

सौजन्य से: pib.gov.in

Prime Minister to launch 10,000 Farmer Producer Organisations (FPOs) all over the country on 29th February 2020

To launch saturation drive to provide Kisan Credit Cards to all the PM Kisan beneficiaries

To participate in the completion of one year of PM KISAN at Chitrakoot, Uttar Pradesh

Prime Minister Shri Narendra Modi shall launch 10,000 Farmers Producer Organisations all over the country at Chitrakoot, 29th February 2020.

Nearly 86% of farmers are small and marginal with average land holdings in the country being less than 1.1 hectare. These small, marginal and landless farmers face tremendous challenges during agriculture production phase such as for access to technology, quality seed, fertilizers and pesticides including requisite finances. They also face tremendous challenges in marketing their produce due to lack of economic strength.

FPOs help in collectivization of such small, marginal and landless farmers in order to give them the collective strength to deal with such issues. Members of the FPO will manage their activities together in the organization to get better access to technology, input, finance and market for faster enhancement of their income.

Completion of One Year of PM-KISAN

The event shall also witness the completion of one year of the launch of PM-KISAN scheme.

Modi Government has launched the Pradhan MantriKisanSammanNidhi (PM-KISAN) Scheme as an income support scheme for farmers to enable them to take care of expenses related to agriculture and allied activities as well as domestic needs.

Under the Scheme, benefit is provided to the eligible beneficiary to the tune of Rs.6000/- per year. It is payable in three 4-monthly instalments of Rs.2000/- each. The payment is made online directly into the bank accounts of the eligible beneficiaries under Direct Benefit Transfer mode.

The Scheme was launched on 24th February, 2019 and has successfully completed one year of implementation on 24th February, 2020.

In a historic decision in its first cabinet meeting Modi 2.0 Government has decided to extend the PM-KISAN scheme to all the farmers.

Special drive to saturate PM-KISAN beneficiaries with Kisan Credit Cards (KCC)

The Prime Minister shall also be launching a saturation drive for distribution of Kisan Credit Cards (KCC) to all the beneficiaries under the PM-KISAN Scheme, on the 29th February 2020.

Over 6.5 Crore of the approximately 8.5 Crore beneficiaries under PM-KISAN Scheme, possess the Kisan Credit Cards.

The saturation drive shall ensure that the remaining about 2 Crore PM-KISAN beneficiaries are also distributed the Kisan Credit Cards.

A 15 day special drive has been launched from 12th February to 26th February to provide access to concessional institutional credit to all the PM-KISAN beneficiaries wherein a simple one page form has to be filled with the basic data including bank account number, land record details and a simple declaration that he is presently not a beneficiary of KCC from any other bank branch. 

All PM-KISAN beneficiaries where applications are received till 26th February will be called to the bank branches on 29th February for handing over the Kisan Credit Cards.

Courtesy: pib.gov.in

राष्‍ट्रपति ने कहा कि आइए हम अपने वैज्ञानिक उद्यम की गुणवत्‍ता और प्रासंगिकता बढ़ाने का संकल्‍प लें

राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने अपने वैज्ञानिक उद्यम की गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि हमारे विज्ञान को देश के लोगों के विकास और भलाई में योगदान देकर जनता के लिए काम करना चाहिए। श्री कोविंद विज्ञान और प्रौ‍द्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा आज नई दिल्‍ली में आयोजित राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

राष्‍ट्रप‍ति ने कहा कि हमें अपने विश्‍वविद्यालय और प्रयोगशाला में सभी उपकरणों, ज्ञान, मानव शक्ति और बुनियादी ढांचे के साथ विज्ञान और वास्‍तव में समाज के सभी हितधारकों तक पहुंचने का लक्ष्‍य निर्धारित करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि कॉरपोरेट सामाजिक जिम्‍मेदारी की तर्ज पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भी वैज्ञानिक सामाजिक जिम्‍मेदारी की अवधारणा को विकसित कर रहा है और इसे नीति में शामिल कर रहा है। इस नीति में वैज्ञानिक बुनियादी ढांचा साझा करने कॉलेज के संकाय को परामर्श देना, अनुसंधान संस्‍कृति को बढ़ावा देना और शीर्ष प्रयोगशालाओं में युवा छात्रों की यात्राओं का आयोजन करना शामिल हैं।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस का मूल उद्देश्‍य विज्ञान के महत्‍व के संदेश का प्रचार करना है। इसके दो पहलू हैं – अपने आप में विज्ञान, शुद्ध ज्ञान की खोज के रूप में और समाज में विज्ञान, जीवन की गुणवत्‍ता बढ़ाने के लिए एक उपकरण के रूप में। वास्‍तव में दोनों ही पहलू आपस में जुड़े हुए हैं, क्‍योंकि इन दोनों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एक ही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से ही हम पर्यावरण, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, उचित आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा, भोजन एवं जल सुरक्षा तथा संचार आदि की चुनौतियों का प्रभावी रूप से समाधान कर सकते हैं। आज हमारे सामने अनेक प्रकार की जटिल समस्‍याएं हैं। विभिन्‍न संसाधनों की मांग और आपूर्ति के बढ़ते हुए असंतुलन से भविष्‍य में टकराव की संभावना है। हम सभी को इन चुनौतियों के स्‍थायी समाधान की अपनी तलाश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर निर्भर रहना होगा। 

सौजन्य से: pib.gov.in

Vice President asks architects to keep conservation and sustainability at the core of their plans

Schooling and skilling must go together: Vice President

Calls for amalgamation of tradition and technology

Stresses upon the urgent need to recognize and promote the inherent skills and talent of Indian youth

Interacts with students of the Architecture and Sculpture college in Mamallapuram

Urges them to safeguard and promote the rich culture and heritage of the country

Lauds exceptional skills and ability of Mamallapuram sculptors

Vice President tells engineers and town planners to find ways to create amenities in rural areas that are on par with urban areas

The Vice President of India, Shri M Venkaiah Naidu today called upon all architects and town planners to keep conservation and sustainability at the core of all their plans. He wanted them to amalgamate tradition and technology to improve the built environment and also work towards sustainable development.

Interacting with students of the College of Architecture and Sculpture in Mamallapuram, Tamil Nadu, he urged students to strive to safeguard and promote the invaluable culture and heritage of the country. He wanted them to blend traditional wisdom with modern science, in their respective disciplines.

Talking about the world heritage site Mamallapuram, Shri Naidu said that the place stands testimony to India’s great heritage and that the Pallava sculptures of Mamallapuram and temple monuments such as the Shore temple, Ratha temples, Cave temples, and Arjuna's Penance or Descent of the Ganges exhibit a rare grace and balance, besides the grandeur of architecture.

The Vice President opined that there could not be a better place for an Architecture and Sculpture college to be located. He said that one could not only see the great diversity of architecture but also see its evolution in these monuments.

Stressing the need to promote eco-friendly green buildings that use less water and optimize energy, Shri Naidu urged all professionals involved in designing new buildings to take full advantage of digital technology to build ‘smart buildings’ with automated operations.

He asked architecture students to find innovative solutions to address the phenomenon of rapid urbanization and explore ways to create amenities in rural areas that were on par with urban centers.

The Vice President also advised students to read more about literature, art forms and gain more knowledge. He asked students to enhance their understanding of Indian art forms including sculpture.

Shri Naidu also asked institutions such as the Architecture College to promote research and innovation that could make our cities happier and safer, and our buildings greener and more cost-effective and affordable.

The Vice President also appreciated the Government of Tamil Nadu for encouraging students to pursue a career in crafts such as the sculpture by providing them training and skilling.

Earlier in the day the Vice President visited Stucco (Sudhai), Stone, Metal and Wood Sculpture Work Studios, the Architecture (Brick) Work Studio and Traditional Painting Work Studio in the campus and saw the statue of Lord Venkateshwara.

Stating that sculpture was one of the best art forms to express Indian culture, Shri Naidu stressed the urgent need to recognize and promote the inherent skills hidden in youth. For this, the Vice President suggested incorporating skilling as an essential part of the education system. "Schooling and Skilling Must go together," he said.

The Vice President appreciated Mamallapuram sculptors for using the hammer and-chisel technique for carving and also for following the time-consuming process enunciated in various Shilpa Shastras.

He lauded the exceptional skills of the sculptors and their ability to replicate complex pieces of art of the Pallava era. “Immensely happy to have seen the work done by students of the Architecture and Sculpture College. A visit to this center of excellence in art and architecture makes me feel rejuvenated”, the Vice President added.

During his visit, the Vice President also unveiled the statue of Saint poet and philosopher Thiruvalluvar in the institution's campus.

The Minister for Tamil Official Language, Tamil Culture and Archaeology, Shri K K Pandiarajan, Additional Chief Secretary to Government, Shri Ashok Dongre, and the Principal of Government College of Architecture and Sculpture, Mahabalipuram, Dr.Rajendran, and other faculty members were present during the Vice President’s interaction with students.

Courtesy: pib.gov.in

President gives Away wards to 21 Winners on National Science day Celebrations

Announces three Key Initiatives for Gender Advancement and Equality in Academic and Research Institutions

Dr. Harsh Vardhan : as Per a Recent National Science Foundation (USA) Report, India has already Climbed to the Third Spot In the Number of Science and Engineering Publications

Calls Upon Scientists to Join National Endeavor to Find S&T Led Solutions to Problems to Meet Challenges of 21 St Century

The President, Shri Ram Nath Kovind, has emphasised on enhancing quality and relevance of our scientific enterprise. He said that our science must work for our people by contributing to their development and well-being. The President announced three key initiatives for gender advancement and equality in academic and research institutions on the occasion of National Science Day in a function held at Vigyan Bhavan in New Delhi today. This year the theme for National Science Day is “Women in Science”. 

Vigyan Jyoti is an initiative that will create a level-playing field for the meritorious girls in high school to pursue Science, Technology, Engineering, and Mathematics (STEM) in their higher education. The Gender Advancement for Transforming Institutions (GATI) will develop a comprehensive Charter and a framework for assessing the Gender Equality in Science, Technology, Engineering and Mathematics (STEM). An online portal for science and technology resources for women will provide E-resources related to all women-specific government schemes, scholarships, fellowships, career counseling with details of subject area experts from various disciplines in science and technology, President Kovind highlighted.

The President said that the basic purpose of the National Science Day is to spread the message of the importance of science. There are two aspects to it – science in itself, as quest for pure knowledge, and science in society, as a tool for enhancing the quality of life. Both are, of course, interlinked, as scientific attitude is common to them. It is through science and technology that we can effectively address challenges of the environment, healthcare, energy for equitable economic growth, food and water security, and communication; to name a few. Challenges before us today are multifold and complex. The increasing mismatch between demand and supply of various resources is likely to lead to conflicts in future. We all will have to rely on science and technology in our search for sustainable solutions to these challenges.

Dr Harsh Vardhan, Minister of Science & Technology, Health and Family Welfare and Earth Sciences applauded the theme ‘Women in Science’ and marked it as a conscious paradigm shift from earlier days. Innovation and gender parity underpin the entire development process. Dr. Harsh Vardhan said that we must move from tokenism to totalism, especially when it comes to creating a gender parity culture in Indian science. The recent special focus on women empowerment by the government has resulted into various special schemes to attract women in science and to provide employment opportunities as well, he added. He said that as per a recent National Science Foundation (USA) Report, India has already climbed to the third spot in the number of science and engineering publications. It is a matter of pride for all that one of our Institutes, JNCASR in Bangalore is judged 7th in the quality of research by Nature Index, he added.

Stating that the new India would bring newer challenges, Dr. Harsh Vardhan called upon scientists to join the national endeavor to find S&T led solutions to the problems to meet the challenges of 21st Century.

President Shri Ram Nath Kovind also conferred national awards for science communication and popularization including women excellence awards for meritorious women scientists. The awards included National Science and Technology Communication Awards, Augmenting Writing Skills for Articulating Research (AWSAR) Awards, SERB Women Excellence Awards, and National Award for Young Woman Showing Excellence through Application of Technology for Societal Benefits.

Professor Ashutosh Sharma, Secretary, Department of Science and Technology (DST) highlighted the necessity of embarking on disruptive and new technologies like artificial intelligence, quantum technology and also emphasized the need for scientific social responsibility in all endeavours. He also mentioned recent and upcoming science communication initiative like Wikipedia, DD Science and so on.

Prof. Gagandeep Kang, Executive Director of the Translational Health Science and Technology Institute (THSTI), Faridabad delivered a Special Talk on the occasion; Prof. Kang is the first women FRS from India.

National Science Day is celebrated every year on 28th February to commemorate the announcement of the discovery of the ‘Raman Effect’ by Sir C.V. Raman for which he was awarded the Nobel Prize in 1930. Government of India designated 28 February as National Science Day (NSD) in 1986. Since then, theme-based science communication activities are carried out all over the country on this occasion.

National Council for Science & Technology Communication (NCSTC), Department of Science and Technology (DST) acts as a nodal agency to support, catalyze and coordinate the celebration of the National Science Day throughout the country in scientific institutions, research laboratories and autonomous scientific institutions associated with the Ministry of Science and Technology.

DST also instituted National Awards for Science Popularization in 1987 to stimulate, encourage and recognize outstanding efforts in the area of science and technology communication and popularization as well as inculcating scientific temper among masses. These awards are presented every year on National Science Day.

Prof K.Vijay Raghavan, Principal Scientific Adviser to Govt., Dr Renu Swarup, Secretary, DBT, Dr Shekhar Mande, DG, CSIR and award winners were among those present on the occasion.

Courtesy: pib.gov.in

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह में 21 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए

शिक्षा तथा अनुसंधान संस्थानों में लैंगिक विकास तथा समानता के लिए तीन प्रमुख कार्यक्रमों की घोषणा की नेशनल साइंस फाउंडेशन (अमेरिका) की ...