Wednesday, 8 April 2020

PM interacts with leaders of political parties


Priority of the government is saving each and every life: PM

Today’s discussion reflects constructive and positive politics, reaffirms India’s strong democratic foundations and spirit of cooperative federalism: PM

The situation in the country is akin to a ‘social emergency’; it has necessitated tough decisions and we must continue to remain vigilant: PM

States, District administrations and Experts have suggested extension of Lockdown to contain spread of the virus: PM

Leaders provide feedback, suggest policy measures, discuss Lockdown and the way forward

Prime Minister Shri Narendra Modi today interacted with floor leaders of political parties in Parliament, via video conference.

Prime Minister said that the entire world is currently facing the grave challenge of COVID-19, adding that the present situation is an epoch changing event in mankind's history and we must evolve to counter its impact. He praised the efforts of state governments working together with the Centre in this fight against the pandemic. He noted that the country has witnessed constructive and positive politics through the coming together of all sections of polity to present a united front in this battle. He also praised the sense of belonging, discipline, dedication and commitment with which each and every citizen is contributing in this endeavour, be it in following social distancing, Janta Curfew or the Lockdown.

Prime Minister underlined the impact of the emerging situation, as witnessed in the resource constraints. Yet, India has been among the few nations to control the pace of spread of the virus till now. He also warned that the situation keeps changing continuously and one needs to maintain vigil at all times.

Prime Minister underlined that the situation in the country is akin to a ‘social emergency’. The country has been forced to take tough decisions, and must continue to remain vigilant. He said that several state governments, district administrations and experts have asked for extension of the phase of Lockdown.

Prime Minister noted that in these changing circumstances, the country should simultaneously try to bring about a change in its work culture and working style. He said that the priority of the government is saving each and every life. He added that the country is facing serious economic challenges as a result of COVID-19, and the government is committed to overcoming them.

Top officials of the Government of India gave detailed presentations on steps being taken to meet the emerging challenges, including status of distribution of benefits under PM Garib Kalyan Yojana.

The leaders thanked the Prime Minister for the meeting, appreciated the timely measures taken by him and said that the entire country is standing united behind him during the crisis. They talked about boosting the health and morale of the healthcare workers, ramping up testing facilities, the need to assist smaller states and UTs and tackling the challenges of hunger and malnutrition. They also spoke about economic and other policy measures to boost the country’s capability in this battle against the pandemic. Suggestions were given by the leaders on extending the Lockdown and on a phased exit after Lockdown ends.

Prime Minister thanked the leaders for their constructive suggestions and feedback, adding that their commitment to assist the government in this battle reaffirms the democratic foundations of the country and the spirit of cooperative federalism.

Union Minister for Parliamentary Affairs, senior officials of Government of India and leaders of political parties from across the country participated in the interaction.

Courtesy: pib.gov.in

डीएसटी ने कोविड 19 से बचाव में नाक छिद्र में उपयोग किए जाने वाले एक जैल के विकास के लिए वित्तपोषण को दी स्वीकृति

डीएसटी सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा, “अन्य सुरक्षात्मक उपायों के साथ विकसित किए जा रहे नासल जेल से सुरक्षा अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी”

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत आने वाली सांविधिक संस्था विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) कोविड-19 को पैदा करने वाले एजेंट नोवेल कोरोना वायरस को वश में करने और निष्क्रिय करने वाली तकनीक तैयार करने के लिए जैव विज्ञान और जैव इंजीनियरिंग विभाग (डीबीबी), आईआईटी बॉम्बे को समर्थन दे रहा है।

वित्तपोषण से डीबीबी, आईआईटी बॉम्बे की टीम को एक जैल विकसित करने में सहायता मिलेगी, जिसे नाक की नली में लगाया जा सकता है जो कोरोना वायरस के प्रवेश के लिए एक प्रमुख द्वार है। इस समाधान से न सिर्फ स्वास्थ्य कर्मचारियों को सुरक्षा सुनिश्चित होने का अनुमान है, बल्कि कोविड-19 के सामुदायिक प्रसार में भी कमी आ सकती है। इससे बीमारी के प्रबंधन में सहायता मिलेगी।

कोविड-19 की संक्रामक प्रकृति को देखते हुए चिकित्सक और नर्स सहित स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के सामने कोविड-19 की देखरेख करते समय अधिकतम जोखिम है। विशेषकर स्पर्शोन्मुख होने के कारण बीमारी के प्रसार में उनके जोखिम के बारे में पता नहीं लगाया जा सकता है।

टीम कोविड-19 के प्रमुख एजेंट सार्स-कोव-2 वायरस के सीमित प्रसार की दो चरणों वाली रणनीति की योजना बना रही है। चूंकि, वायरस सबसे पहले फेफड़ों की कोशिकाओं में अपनी प्रतिकृतियां पैदा करता रहता है, इसलिए रणनीति का पहला भाग वायरस को मेजबान कोशिकाओं के साथ जुड़ने से रोकना होगा। इससे भले ही मेजबान कोशिकाओं का संक्रमण घटने का अनुमान है, लेकिन वायरस सक्रिय बना रहेगा। इसलिए उन्हें निष्क्रिय करने की जरूरत होगी।

दूसरे चरण में जैविक अणु शामिल किए जाएंगे, जिससे डिटर्जेंट की तरह वायरसों को फंसाकर निष्क्रिय किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद, इस रणनीति के तहत जेल विकसित किया जाएगा जो नाक के छिद्र में लगाया जा सकता है।

डीएसटी सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा, “वायरस के खिलाफ लड़ रहे हमारे स्वास्थ्य कर्मचारी और अन्य को पूर्ण 200 प्रतिशत सुरक्षा के हकदार हैं। नासल जेल को अन्य सुरक्षात्मक उपायों के साथ विकसित किया जा रहा है, जिससे उन्हें सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मिलेगी।”

डीबीबी, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर किरण कोंडाबगील, प्रोफेसर रिंती बनर्जी, प्रोफेसर आशुतोष कुमार और प्रोफेसर शमिक सेन इस परियोजना का हिस्सा होंगे। टीम को विषाणु विज्ञान, संरचनात्मक जीव विज्ञान, जैव भौतिकी, बायोमैटेरियल्स और दवा वितरण के क्षेत्रों में खासा अनुभव है और इस तकनीक के लगभग 9 महीनों में विकसित होने का अनुमान है।

(ज्यादा विवरण के लिए प्रोफेसर किरण कोंडाबगील से kirankondabagil@iitb.ac.in, मोबाइल : 9619739630 पर संपर्क करें)

सौजन्य से: pib.gov.in

गृह मंत्रालय ने राज्यों से कोविड-19 से मुकाबला करने के लिए लॉकडाउन के तहत, आवश्यक वस्तु (ईसी) अधिनियम 1955 के प्रावधानों को लागू करते हुए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा

देश में आवश्यक वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति को बनाए रखने के क्रम में, केंद्रीय गृह सचिव, श्री अजय कुमार भल्ला ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जरूरी कदम उठाते हुए आवश्यक वस्तु (ईसी) अधिनियम 1955 के प्रावधानों को लागू करने को कहा है। इन उपायों में स्टॉक सीमा का निर्धारण, मूल्यों की अधिकतम सीमा, उत्पादन में वृद्धि, विक्रेताओं के खातों का निरीक्षण और इसी प्रकार की अन्य गतिविधियां शामिल हैं।


विशेष रूप से श्रम आपूर्ति में कमी जैसे कई कारकों के कारण उत्पादन में हानि की खबर है। इस स्थिति में, स्टॉक संचयन/ जमाखोरी और कालाबाजारी, मुनाफाखोरी और सट्टा व्यवसाय जैसी संभावनाओं के परिणामस्वरूप आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती है। राज्यों को बड़े पैमाने पर जनता के लिए उचित मूल्य पर इन वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कहा गया है।

इससे पूर्व, गृह मंत्रालय (एमएचए) आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत अपने आदेशों में खाद्य पदार्थों, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों जैसे आवश्यक सामानों के संबंध में निर्माण/ उत्पादन, परिवहन और अन्य संबंधित आपूर्ति-श्रृंखला गतिविधियों की अनुमति दे चुका है।

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार का उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय 30 जून, 2020 तक केंद्र सरकार की पूर्व सहमति जैसी आवश्यकता में भी छूट देते हुए ईसी अधिनियम, 1955 के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश देने के लिए अधिकृत कर रहा है।

ईसी अधिनियम के तहत अपराध, एक आपराधिक जुर्म हैं और इसके परिणामस्वरूप 7 वर्ष की सज़ा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, कालाबाजारी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के रखरखाव निवारण अधिनियम, 1980 के तहत अपराधियों को हिरासत में लेने पर भी विचार कर सकते हैं।

सौजन्य से: pib.gov.in

कोविड-19 से लड़ने में सीएसआईआर के साथ खड़ा है उद्योग जगत

कोविड-19 से लड़ने के लिए सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ शेखर सी. मांडे की अध्यक्षता में एक रणनीतिक समूह भी गठित किया गया है

सीएसआईआर के पाँच सूत्रीय एजेंडा में से किसी में भी योगदान देने की इच्छुक कोई भी लैब या वैज्ञानिक कार्यसमूह में शामिल प्रमुखों से संपर्क कर सकते हैं-- डॉ मांडे


कोविड-19 से लड़ने के लिए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने पाँच स्तरीय रणनीति अपनायी है, जिस पर अमल करने के लिए उसे उद्योग जगत का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह जानकारी सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ शेखर सी. मांडे ने प्रदान की है। वह सीएसआईआर की 38 प्रयोगशालाओं के निदेशकों के साथ कोविड-19 से जुड़ी रणनीति पर चर्चा के लिए आयोजित एक ऑनलाइन जूम मीटिंग को संबोधित कर रहे थे।

कोविड-19 से निपटने के सीएसआईआर की प्रयोगशालाएं पाँच स्तरों पर काम कर रही हैं। इन रणनीतियों को अमली जामा पहनाए जाने के लिए कुछ कंपनियों से करार किया गया है। इन कंपनियों में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल), सिप्ला, टीसीएस, भारत बायोटेक, रिलायंस, टाटा सन्स, यूनिलीवर, इंटेल, टीसीएस, कैडिला और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल हैं। डॉ मांडे ने बताया कि सीएसआईआर को इन कंपनियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। सीएसआईआर की कोर टीम, जिसमें इसकी प्रयोगशालाओं के आठ निदेशक शामिल हैं, महानिदेशक, डॉ शेखर मांडे के नेतृत्व में कोविड-19 से लड़ने के लिए काम कर रहे हैं।

सीएसआईआर ने निजी सुरक्षा एवं नैदानिक उपकरणों के लिए रिलायंस के साथ समझौता किया है। वहीं, टाटा सन्स भी निजी सुरक्षा उपकरणों और अस्पतालों के सहायक उपकरणों की कमी दूर करने के लिए मदद कर रही है। यूनिलीवर जिंक ग्लूकानेट व प्रोलीन कॉम्पलेक्स के उत्पादन और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद कर रही है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इंटेल ने डिजिटल निगरानी में मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, तो टीसीएस डिजिटल निगरानी और आपूर्ति श्रृंखला दोनों में सहयोग कर रही है। दवाओं के पुनर्संयोजन के लिए सिप्ला, कोरोना वायरस की थेरेपी के लिए कैडिला और निष्क्रिय वैक्सीन पर भारत बायोटेक सीएसआईआर के साथ काम कर रही हैं। इलेक्ट्रोस्टेटिक स्प्रे और वेंटीलेटर विकसित करने के लिए बीएचईएल और थर्मोमीटर एवं ऑक्सीजन यूनिट के उत्पादन के लिए बीईएल जैसी कंपनियां सीएसआईआर के साथ मिलकर काम कर रही हैं।



डिजिटल तथा आणविक निगरानी का कार्य इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स ऐंड इंटीग्रेटेड बायोलॉजी (आईजीआईबी) के निदेशक डॉ अनुराग अग्रवाल की देखरेख में किया जा रहा है। त्वरित एवं किफायती निदान किट का विकास सेंटर फॉर सेल्युलर ऐंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के निदेशक डॉ राकेश मिश्रा के नेतृत्व में किया जा रहा है। दवाओं के विकास व पुनर्संयोजन का कार्य इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) के निदेशक डॉ एस. चंद्रशेखर देख रहे हैं। अस्पतालों में उपयोग होने वाले सहायक उपकरणों के विकास की जिम्मेदारी नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरी के निदेशक डॉ जितेंद्र जे. जाधव को सौंपी गई है। जबकि, निजी सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति का काम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम के निदेशक डॉ अंजन रे की देखरेख में किया जा रहा है।



कोविड-19 से लड़ने के लिए डॉ मांडे की अध्यक्षता में एक रणनीतिक समूह भी गठित किया गया है। डॉ मांडे कार्यसमूह के साथ मिलकर इन कार्यक्षेत्रों की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि सीएसआईआर के पाँच सूत्रीय एजेंडा में से किसी में भी योगदान देने की इच्छुक कोई भी लैब या वैज्ञानिक कार्यसमूह में शामिल प्रमुखों से संपर्क कर सकते हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) के निदेशक डॉ राम ए. विश्वकर्मा को इस कार्यसमूह का समन्वयक बनाया गया है।

सौजन्य से: pib.gov.in

Indian researchers start working on novel coronavirus genome sequencing

Novel coronavirus is a new virus and researchers are trying to figure out all the different aspects of it. Two institutes of Centre for Scientific and Industrial Research (CSIR) Centre for Cellular and Molecular Biology (CCMB), Hyderabad and Institute of Genomics and Integrative Biology (IGIB), New Delhi have started working together on the whole genome sequencing of novel coronavirus.

“This will help us to understand the evolution of the virus, how dynamic is it and how fast it imitates. This study will help us to know how fast it evolves and what are the future aspects of it” said Dr Rakesh Mishra, Director, CCMB while speaking withSenior ScientistJyoti Sharma fromIndia Science Wire, DST.

Whole-genome sequencing is the method used to determine the complete DNA sequence of a specific organism’s genome. The approach for sequencing the latest coronavirus involves getting samples from patients that have are found to be positive and sending these samples to a sequencing centre. Genome sequencing need very large number of samples for study. “Without much data if you make any conclusion that may not be right. At the moment we are accumulating as many sequencings as we can and once, we have few hundred sequencing with us then we will be able to make many inferences from many biological aspects of this virus” said Dr Mishra.

Three to four people from each institute are continuously working on the whole genome sequencing. In the next 3-4 weeks researchers would be able to get at least 200-300 isolates and this information would help them to make some further conclusion about behaviour of this virus. For this purpose, National Institute of Virology (NIV), Pune has also been requested to give virus that has been isolated from different places. This will help the scientists to cover the whole country to get a bigger and clearer picture. This will help the institutes to establish the family tree of the virus. Dr Mishra told that based on this they can study from where the virus has come which strain has more similarity, the varied mutations and which strain is weak and what strain is strong. “This will give some strategic clues to understand it and to implement better isolation strategies” he said.

In addition to this the institute has also increased the testing capacity. A large number of people are undergoing testing and they would go for mass screening. This will help them to identify the number of positive cases and then send them for isolation or quarantine.

Courtesy: pib.gov.in

CSIR-Central Electrochemical Research Institute (CSIR-CECRI) working with Industry to Scale up Personal Protective Equipment

Digital training to make face masks by interested rural women


Under the present COVID-19 pandemic situation, in line with CSIR’s special efforts, its constituent lab CSIR-CECRI (Central Electrochemical Research Institute) at Karaikudi, Tamil Nadu, has come out with helping hands to reach out to the society through scientific service in mitigating COVID-19. In the current situation, Sanitizers, Hospital assisting Devices and Personal Protective Equipment (PPE) are essential. In that direction CSIR-CECRI prepared series of lab made PPEs that include Hand sanitizer solutions, as per the WHO recommendations (Iso-propanol 75%, Glycerol 1.45%, Hydrogen peroxide 0.125% plus lemongrass oil for fragrance), Hand wash solutions using coconut oil and Sodium hypochlorite based disinfectant solutions. These solutions were packed in containers, printed for instructions to use and distributed to the needy organizations at free of cost.



So far, around 350 Litres of Hand sanitizers, 250 Litres of Hand wash solutions and 1000 Litres of Hypo-disinfactants have been distributed. The beneficiaries include Karaikudi Municipal Corporation, Devakottai Municipal Corporation, Sivaganga Govt. Medical College Hospital, Govt. Hospital, Karaikudi, SP office Sivaganga and other police stations in and around Karaikudi, Taluk office and nearby Panchayat Unions and primary health centres from Sakkottai, Kottaiyur, R.S. Pattinam, Nerkuppai, few nationalized banks etc. CECRI plans to continue this distribution till the COVID-19 situation restores to normalcy. 



In addition, CSIR-CECRI has recently started offering digital training to make face masks by interested rural women to help them as well as to cater to the needs of their neighbourhood. On the other hand, 3D printed face shield with reusable options has been in-house printed and gifted to the Dispensary staff of CSIR-CECRI to protect them effectively from sneeze, cough and aerosol communication of the patients.



CSIR-CECRI is tying up with industry to scale up the mass production and has partnered with a company 3D Lycan, Bangalore for Face Shield. CSIR-CECRI is now committed to arrive at a synergistically improved version of Face shield with antimicrobial efficiency within the shortest possible period. CSIR-CECRI is also transferring the technology of one of the popular CSIR-CECRI technologies on the electrochemical synthesis of hypo-chlorite (Disinfectant), This is transferred to an interested MSME for its mass production and supply as disinfectant spray for its wider deployment in public places, hospitals etc. In this way, CSIR-CECRI lives upto the expectations of the society and also rises to the occasion in fulfilling the needs of the society and the dreams of the great philanthropist, Dr. RM. Alagappa Chettiar, who has donated land and cash and was instrumental in establishing CSIR-CECRI in the heritage town of Karaikudi

CSIR-Central Electrochemical Research Institute (CECRI), a premier research establishment under the aegis of Council of Scientific and Industrial Research (CSIR), New Delhi, focussing on a gamut of problems covering all facets of electrochemical science and technology: viz., Corrosion Science and Engineering, Electrochemical Power Sources, Electrochemical Materials Science, Electro-organic and Electro-inorganic Chemicals, Electrodics and Electrocatalysis, Electro-metallurgy, Electro Plating and Metal Finishing Technology. CSIR-CECRI's activities are directed towards the development of new and improved products and process as well as innovations in electrochemical science and technology. CSIR-CECRI runs several projects in collaboration with laboratories and private companies within and outside India.



CSIR-CECRI assists the Indian Industry by conducting surveys and undertaking consultancy projects. As part of its human resource development programme, CECRI runs a four-year B.Tech. course in Chemical & Electrochemical Engineering apart from encouraging Ph.D. scholars for their research under the Academy of Scientific and Innovative Research (AcSIR). Further, CSIR-CECRI is alive to societal obligations by way of offering ‘skill development' training and Jigyasa programs for the benefit of Indian youth.

Courtesy: pib.gov.in

Biofortified carrot variety developed by farmer scientist benefits local farmers

Madhuban Gajar, a biofortified carrot variety with high β-carotene and iron content developed by Shri Vallabhhai Vasrambhai Marvaniya, a farmer scientist from Junagadh district, Gujarat is benefitting more than 150 local farmers in the area. It is being planted in an area of over 200 hectares in Junagadh, and the average yield, which is 40-50 t/ha, has become the main source of income to the local farmers. The variety is being cultivated in more than 1000 hectares of land in Gujarat, Maharashtra, Rajasthan, West Bengal, Uttar Pradesh during the last three years.

The Madhuvan Gajar is a highly nutritious carrot variety developed through the selection methodwith higher β-carotene content (277.75 mg/kg) and iron content (276.7 mg/kg) dry basis and is used for various value-added products like carrot chips, juices, and pickles. Among all the varieties tested, beta-carotene and iron content were found to be superior.

National Innovation Foundation (NIF) – India, an autonomous institute under the Department of Science and Technology,Govt. of India conducted validation trials for this variety at Rajasthan Agricultural Research Institute (RARI), Jaipur, between 2016 and 2017. In the trials, it was found that Madhuban Gajar carrot variety possesses a significantly higher root yield (74.2 t/ha) and plant biomass (275 gm per plant) as compared to check variety.

The on-farm trials of the variety were conducted over 25 hectares of land by NIF in different states like Gujarat, Maharashtra, Rajasthan, Assam, Haryana, Punjab and West Bengal which involved more than 100 farmers where the performance of the variety (MadhuvanGajar) was found to be appreciable in term of yield and its other properties.

During 1943, Shri Vallabhhai Vasrambhai Marvaniya found that a local carrot variety which was profoundly used for fodder to improve the quality of milk. He selectively cultivated this variety and sold this carrot in the market at a good price. Since then, he, along with family, is working for the conservation and development of this cultivar. The production and marketing of seeds of the variety are taken care of by his son Shri Arvindbhai and the average sale is about 100 quintals per annum. Around30 local seeds suppliers are involved for the seed marketing of the variety throughout the country, andthe production of seeds is being under taken out byShri Vallabhhai himself with a group of some local farmers.

During the early years of the development of this variety,Shri Vallabhhai selected the best plants for seed production and grew them in a small area for domestic consumption as well as for marketing. Later on, demand for this carrot grew, and he started cultivation on a large scale during the 1950’s. He also started distributing the seeds to other farmers in his village and adjoining areas in the 1970s. During 1985, he started selling the seeds on a large scale. The average yield of Maduvan Gajar is 40 – 50 t/ha and had been cultivated in Gujarat, Maharashtra, and Rajasthan successfully.

Shri VallabhaiVasrambhai Marvaniyawas conferred with a National Award by the President of India at Rashtrapati Bhavan, New Delhi during Festival of Innovation (FOIN) – 2017. He was conferred with Padma Shri in the year 2019 for his extraordinary work.

Courtesy: pib.gov.in

PM interacts with leaders of political parties

Priority of the government is saving each and every life: PM Today’s discussion reflects constructive and positive politics, reaffir...