Wednesday, 26 February 2020

North East Sustainable Development Goal 2020 – Day 3

The third and final day of the North East Sustainable Development Conclave in Guwahati witnessed three technical sessions with participation from senior government officials, civil society organisations, think tanks, academia, media and startups.

The day began with the fifth technical session of the conclave on Education, Skill Development and Entrepreneurship, which was chaired by Shri Rajiv Kumar Bora, Additional Chief Secretary, Finance, Govt of Assam. Issues surrounding high incidence of dropout, low enrolment, teachers’ absenteeism, habitation without schooling facilities, quality issues, etc. were deliberated upon.

The session substantially focused on issues around vocational education, skill development, entrepreneurship development and creation of jobs. “Strengthening and linking the education, skilling and entrepreneurial ecosystem will be key driver of holistic development in the North Eastern Region”, said Shri Rajiv Kumar Bora.

The sixth technical session on Communication, Connectivity and Infrastructure Development was chaired by Dr. ShiladityaChattarjee, Adviser (SDGs) Government of Assam. The session saw participation of experts from waterways, transport and the academia. The importance of physical as well as digital infrastructure development, an area of concern in this region, was impressed upon. The session ended with a discussion on replicable solutions and the need for fostering partnerships for adopting cost effective technology for infrastructure development.

The seventh and the final technical session of the Conclave Addressing Inequality and Exclusion in the North East was chaired by Ms. Sanyukta Samaddar, Adviser (SDGs) NITI Aayog, Government of India. Representatives from civil society organisations and cooperative banks participated in the discussion. The session was based on the core SDG principle of ‘Leave No One Behind’, which is especially pertinent to the diverse North Eastern Region. The session brought together various initiatives to address inequality faced by different communities and regions within the northeast that are at risk for exclusion.

The Way Forward and Valedictory session was chaired by Shri Moses Chalai, Secretary North Eastern Council. All the recommendations and suggestions presented in the 3-day Conclave were summarised for a holistic way forward. Senior government officials from all the eight north eastern states were part of the session to deliberate on the paths forward for implementing and achieving the SDGs. Ways for convergence and collaboration of all the stakeholders were explored for making greater impact. “States are the biggest stakeholders in the achievement of SDGs. Community partnership and ownership are also critical elements in this process. So is bringing women on board.”, said Shri Moses Chalai.

The session ended with a shared perspective of taking collaborative steps towards improving innovation, cooperation and partnerships for sustainable development. The valedictory address was delivered by Ms. Shoko Noda, Resident Representative, UNDP India. “Localising SDGs in the NER would entail working with the State Governments and local communities especially those sections that are vulnerable, in the spirit of leaving no one behind.”, said Ms. Shoko Noda.

The deliberations on the 3rd Day focusing on education, entrepreneurship, skill development, transport & infrastructure connectivity, addressing inequalities & exclusion and the recommendations which emerged will provide valuable inputs towards India’s second Voluntary National Review during the United Nations High Level Political Forum scheduled to be held in July 2020.

“In a milestone achievement, 8 states have finalised and launched their SDG State Indicator Framework thereby aligning their monitoring and evaluation systems with SDG targets.”, said Sanyukta Samaddar, Adviser (SDG) NITI Aayog, in her closing remarks.

North East Sustainable Development Goals Conclave 2020 was held from 24th – 26th February 2020, at the Assam Administrative Staff College, Guwahati with the goal of identifying solutions as well as accelerators for the implementation of SDGs in the North Eastern Region (NER). The 3-day Conclave was organized by NITI Aayog, in partnership with the North Eastern Council, Govt. of Assam and Tata Trusts, the conclave was supported by UNDP and RIS.

NITI Aayog has the mandate of overseeing the adoption and monitoring of SDGs at the national and sub-national level. Progress in the northeast region is crucial in this decade of action for the country to achieve the SDGs by 2030 and this conclave is part of NITI Aayog’s continuous efforts towards fostering partnerships at the sub-national level. In terms of SDG localisation, the states in the region have taken major strides in integrating the Agenda 2030 framework in their developmental planning and vision documents.

Courtesy: pib.gov.in

Goodwill Flight with Emergency Medical Assistance from India to Peoples Republic of China (PRC)

A special flight of Indian Air Force (IAF) comprising of crew, medical team and support staff today departed from Air Force Station, Palam, New Delhi to Wuhan, China. The C-17 Globemaster III airlifted approximately
15 tonnes of medical supplies as a goodwill gesture from the Government of India. 

On its return, the same aircraft will retrieve approximately 120 personnel + 05 children in arms from Wuhan. The passengers for the return leg will mainly comprise of Indian citizens and citizens from friendly foreign countries. It is likely to return during early morning hours on 27 Feb 20 to Air Force Station, Palam.

Courtesy: pib.gov.in

स्वीडन के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग का दौरा किया

स्वीडन की संसद रिक्सदग में संविधान समिति के दस सदस्यीय सांसद प्रतिनिधिमंडल ने आज निर्वाचन आयोग का दौरा किया। रिक्सदग में संविधान समिति की अध्‍यक्ष और सांसद सुश्री करिन एनस्ट्रोम के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ दो संसदीय अधिकारी और नई दिल्ली में स्वीडन दूतावास के दो राजनयिक भी थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्तों श्री अशोक लवासा और श्री सुशील चंद्रा से मुलाकात की।

मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी, शांतिपूर्ण, समावेशी, सुलभ, नैतिक और सहभागी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत में हुए पिछले राष्ट्रीय चुनावों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के आधुनिक साधनों का उपयोग करते हुए पिछले लोकसभा चनावों और हाल ही में संपन्‍न राज्‍य विधान सभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को बाधामुक्‍त और मतदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए कई नवीन उपाय किए गए। उन्होंने कहा कि दिव्‍यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मतदान को सुलभ करने पर विशेष ध्यान दिया गया था। श्री अरोड़ा ने मेहमान सांसदों और अधिकारियों को चुनाव आयोग के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी। इसमें नई दिल्ली में भारत ए-वेब (एसोसिएशन ऑफ वर्ल्ड इलेक्शन बॉडीज) सेंटर की स्थापना शामिल है जहां 115 सदस्यीय संघ के साथ बेहतर कार्यप्रणाली साझा करने और उसकी क्षमता निर्माण के उद्देश्‍य से प्रलेखन, अनुसंधान और प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्‍होंने कहा कि चुनाव आयोग भविष्‍य में स्‍वीडन चुनाव प्राधिकरण के साथ काम करने को उत्‍सुक है।

चुनाव आयुक्त श्री अशोक लवासा ने कहा कि आयोग ने लोकतंत्र की प्रगति को फैलाने के लिए कई कदम उठाए हैं। चुनाव आयुक्त श्री सुशील चंद्रा ने प्रतिनिधिमंडल को चुनाव में धनशक्ति के उपयोग को रोकने के लिए आयोग द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी।

रिक्सदग में संविधान समिति की अध्यक्ष और सांसद सुश्री करिन एनस्ट्रोम ने स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी के साथ स्वागत करने के लिए आयोग का धन्यवाद किया। उन्होंने स्वीडन की चुनावी प्रणाली के बारे में बताया, जहां एक साथ नगरपालिका, काउंटी और राष्ट्रीय चुनाव कराए जाते हैं। सुश्री एनस्ट्रॉम ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल भारतीय चुनावों के परिमाण और इसे संपन्‍न कराने के चुनाव आयोग के तरीकों से प्रभावित है।

चुनाव आयोग के महासचिव श्री उमेश सिन्हा ने विश्‍व में सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया के प्रबंधन की संरचना और कामकाज के बारे में एक प्रस्तुति दी। स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल के लिए संसदीय चुनाव-2019 पर एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।

सौजन्य से: pib.gov.in

मंत्रिमंडल ने इंडिया पोर्ट्स ग्‍लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) को डीपीई दिशानिर्देशों में छूट देने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंडिया पोर्ट्स ग्‍लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) के लिए आरक्षण एवं सतर्कता नीतियों को छोड़कर डीपीई दिशानिर्देशों में छूट देने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी है। 

आईपीजीएल की स्‍थापना ईरान में चाबहार के शाहिद बेहेस्‍ती बंदरगाह के विकास एवं प्रबंधन के लिए जहाजरानी मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) और दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट (डीपीटी) [पूर्व में कांडला पोर्ट ट्रस्ट (केपीटी)] के संयुक्त रूप से प्रवर्तित एक विशेष उद्देशीय कंपनी के रूप में कंपनी अधिनियम 2013 के तहत की गई थी। 

व्‍यापक संयुक्त कार्य योजना (जेसीपीओए) से संयुक्त राज्य अमेरिका हटने के बाद विदेश मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2018 को जहाजरानी मंत्रालय को सलाह दी थी कि जेएनपीटी और डीपीटी को अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव से बाहर किया जाए।

इसके आधार पर और अधिकार प्राप्त समिति के अनुमोदन के साथ जेएनपीटी एवं डीपीटी के सभी शेयरों की खरीदारी सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एसडीसीएल) द्वारा 17 दिसंबर, 2018 को की गई थी। एसडीसीएल एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसई) है और इसलिए एसडीसीएल की सहायक कंपनी के तौर पर आईपीजीएल भी सीपीएसई बन गई है। परिणामस्‍वरूप, डीपीई के दिशानिर्देश तकनीकी तौर पर आईपीजीएल पर लागू होते हैं।

चूंकि चाबहार पोर्ट सामरिक उद्देश्यों के साथ देश की पहली विदेशी बंदरगाह परियोजना है। इसलिए आईपीजीएल को बोर्ड द्वारा प्रबंधित कंपनी के रूप में कार्य करने की अनुमति देने की तत्काल आवश्यकता है। जहाजरानी मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए उस पर 5 वर्ष की अवधि के लिए डीपीई के दिशानिर्देश लागू नहीं होंगे। तदनुसार, जहाजरानी मंत्रालय ने परियोजना के सुचारू निष्पादन के लिए डीपीई दिशानिर्देशों की प्रयोज्यता से आईपीजीएल को छूट का अनुरोध किया है। 

सौजन्य से: pib.gov.in

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जम्‍मू और कश्‍मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 96 के अंतर्गत केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू और कश्‍मीर में केन्‍द्रीय कानूनों के समवर्ती आदेश को जारी करने को स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्‍द्र सरकार द्वारा जम्मू और कश्‍मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 96 के अंतर्गत केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में केन्द्रीय कानूनों के समवर्ती आदेश को जारी करने को स्वीकृति दे दी है।

जम्‍मू और कश्‍मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के प्रभावी होने के बाद तत्‍कालीन जम्‍मू और कश्‍मीर राज्‍य को 31 अक्‍टूबर, 2019 से केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू एवं कश्‍मीर और केन्‍द्र शासित प्रदेश लद्दाख के रूप में मान्‍यता दे दी गई है।

31 अक्‍टूबर, 2019 से पूर्व जम्‍मू और कश्‍मीर राज्‍य के अलावा सभी केन्‍द्रीय कानून पूरे भारत में लागू होते हैं, परन्‍तु 31 अक्‍टूबर, 2019 से नियुक्‍त केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू और कश्‍मीर में भी यह लागू हो गये हैं। केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू और कश्‍मीर के संबंध में, प्रशासनिक प्रभावशीलता और सुचारू परिवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्‍यक बदलावों और संशोधनों के साथ समरूपी सूची के अंतर्गत तैयार किये गये केन्‍द्रीय कानूनों को अपनाने के लिए यह आवश्‍यक है, ताकि भारतीय संविधान के अनुरूप इन्‍हें लागू करने में किसी प्रकार की अस्‍पष्‍टता को दूर किया जा सकें।

जम्‍मू और कश्‍मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 96 के अंतर्गत केन्‍द्र सरकार के पास कानूनों को आवश्‍यकतानुसार ढालने और उनमें संशोधन करने का अधिकार है, इन्‍हें उत्‍तराधिकारी केन्‍द्र शासित प्रदेशों के संदर्भ में निर्धारित तिथि से एक वर्ष की अवधि के पूर्ण होने से पूर्व किसी भी कानून को अपनाने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्‍य से या तो आवश्‍यक या व्‍यावहारिक अथवा निरस्‍त या संशोधित किया जा सकता है।

इसी के अनुरूप, केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने आज हुई अपनी बैठक में जम्‍मू और कश्‍मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 96 के अंतर्गत प्रदत्‍त शक्तियों का उपयोग करते हुए केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू और कश्‍मीर के लिए ऐसे 37 केन्‍द्रीय कानूनों को अपनाने और उनमें सुधार करने के लिए केन्‍द्र सरकार के द्वारा जारी एक आदेश के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दे दी है। इन सुधारों के साथ उपर्युक्‍त केन्‍द्रीय कानूनों को अपनाने से केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू और कश्‍मीर में प्रशासनिक प्रभावशीलता को सुनिश्चित करने के साथ-साथ भारतीय संविधान के अनुरूप इन कानूनों को लागू करने में किसी तरह की अस्‍पष्‍टता को दूर किया जाएगा।

सौजन्य से: pib.gov.in

International Conference on Standardisation of AYUSH Terminologies concludes in Delhi

ICoSDiTAUS-2020, the two-day International Conference on Standardisation of Diagnosis and Terminologies in Ayurveda, Unani and Siddha Systems of Medicine concluded in New Delhi today with adopting the “New Delhi Declaration on Collection and Classification of Traditional Medicine (TM) Diagnostic Data”.

The sixteen countries which came together for the cause of Traditional Medicine at this conference are Sri Lanka, Mauritius, Serbia, Curacao, Cuba, Myanmar, Equatorial Guinea, Qatar, Ghana, Bhutan, Uzbekistan, India, Switzerland, Iran, Jamaica and Japan.

ICoSDiTAUS-2020 is the biggest ever international event dedicated to standardisation of Diagnosis and Terminologies of Traditional Medicine in terms of the broad level of participation covering virtually all the continents.

The inaugural address of Dr. Poonam Khetrapal Singh, Regional Director, WHO - SEARO on 25th February 2020 set the tone for the conference, and underlined the power of TM systems and their significance in addressing the public health challenges of the 21st century. Dr Samira Asma, Assistant Director General, WHO, joined in through video conference,emphasised on the potential of strategic use of data and evidence to advance TM systems into public health. Dr. Rajesh Kotecha, Secretary, AYUSH, in his talk in the inaugural session explained the extent of the contribution being made in Traditional Medicine systems in India in the effort to achieve universal health coverage.

The topics discussed in the conference included:
  • The challenges in Counting and classification of traditional medicine encounters.
· Adapting ICD to TM Systems and their implementation.

· Relevance and regulation of Traditional Medicine in Health Systems.

· TM data and digital health, in which the global picture was presented by Prof Kenji Watanabe of Japan, a leading proponent of adoption of TM in public health, and country perspectives were given by different participants.

Mr Alexander Kodwo Kom Abban, Deputy Minister for Health, Govt. of Ghana and Mrs. Suzanne Camelia Romer, Minister of Health of Curacao took leadership roles in the deliberations, and strongly advocated adopting Information Technology and new statistical tools for advancing the practice of TM systems across the globe.

The conference succeeded in taking forward the objective of expanding the International Classification of Diseases(ICD) into the realm of Traditional Medicine systems at a conceptual level with all the countries endorsing the same. There was also a consensus that work on the second module of the Traditional Medicine Chapter of ICD should be expedited, and collaborative efforts of stake-holding countries are needed for this. The suitability of Ayurveda, Unani and Siddha systems for inclusion in the TM Chapter of ICD was also pointed out.

The New Delhi declaration emphasised the commitment of the countries to Traditional Medicine as a significant area of health care. It further sought the opportunity for including traditional systems of medicine like Ayurveda, Unani and Siddha in the International Classification of Diseases of WHO which is the standard diagnostic tool for health management across the world.

Courtesy: pib.gov.in

Government of India announces Maiden Summit on Artificial Intelligence to spearhead social empowerment, inclusion and transformation

The Government of India (GoI) announced the mega event, RAISE 2020- ‘Responsible AI for Social Empowerment 2020,’ to be held from April 11-12 in New Delhi. RAISE 2020 is India's first Artificial Intelligence summit to be organized by the Government in partnership with Industry & Academia. The summit will be a global meeting of minds to exchange ideas and charter a course to use AI for social empowerment, inclusion and transformation in key areas like Healthcare, Agriculture, Education and Smart Mobility amongst other sectors. Ahead of the summit, MeitY organized an Industry Consultation with industry representatives to bring in synergies within India’s Artificial Intelligence landscape.

The consultation was chaired by Shri. Ajay Prakash Sawhney, Secretary,Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY); Shri.Gopalakrishnan S., Additional Secretary, MeitY; Smt. Jyoti Arora, Additional Secretary & Financial Advisor, MeitY; Shri.Sanjay Goel, Joint Secretary, MeitY; Shri.Saurabh Gaur, Joint Secretary, MeitY and Shri.Abhishek Singh, President and CEO, National e-Governance Division (NeGD) from the Government. Apart from the Government, Industry associations including FICCI, CII, ASSOCHAM & NASSCOM and corporates namely Intel, AWS, KPMG, IBM, Oracle and AI startups amongst others participated in the consultation.

Speaking on the occasion, Shri. Ajay Prakash Sawhney, Secretary,Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY), said,“We are extremely delighted to announce the first of its kind two-day summit- ‘Responsible AI for Social Empowerment 2020’. In our opinion, a data-rich environment like India has the potential to be the world’s leading AI laboratory which can eventually transform lives globally. AI technology is a powerful tool that can be used to create a positive impact in the Indian context, further becoming the AI destination for the world.”

Explaining in detail about the first of its kind event, Shri. Abhishek Singh, President and CEO, National e-Governance Division (NeGD), said, “The name ‘RAISE 2020’ came into being because we want to leverage responsible AI practices for enabling the masses. Through this summit we will outline India’s vision for utilizing the power of Artificial Intelligence to responsibly transform the social landscape for a better tomorrow. RAISE 2020 will facilitate an exchange of ideas to further create a mass awareness about the need to ethically develop and practice AI in the digital era."

During session, the Government also launched the AI-Startup Challenge and the event website as a part of championing the AI movement in India.

About RAISE 2020:

RAISE 2020 is a first of its kind, global meeting of minds on Artificial Intelligence to drive India's vision and roadmap for social empowerment, inclusion and transformation through responsible AI. The event will start with a Startup Challenge – Pitchfest followed by the two-day summit, organized by Government of India along with Ministry of Electronics and Information Technology will witness robust participation from global industry leaders, key opinion makers, Government representatives and academia.


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Courtesy: pib.gov.in

North East Sustainable Development Goal 2020 – Day 3

The third and final day of the North East Sustainable Development Conclave in Guwahati witnessed three technical sessions with participati...