Monday, 7 September 2020

भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और विश्व बैंक ने हिमाचल प्रदेश राज्य सड़क रूपांतरण परियोजना के कार्यान्वयन के लिए 82 मिलियन डॉलर ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और विश्व बैंक ने आज हिमाचल प्रदेश राज्य सड़क रूपांतरण परियोजना के कार्यान्वयन के लिए 82 मिलियन डॉलर ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए जो राज्य सड़क नेटवर्क की स्थिति, सुरक्षा, लचीलापन एवं इंजीनियरिंग मानकों में सुधार लाने के जरिये हिमाचल प्रदेश के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा संस्थानों को सुदृढ़ बनायेगा।

हिमाचल प्रदेश राज्य सड़क रूपांतरण परियोजना जलवायु एवं आपदा लचीली सड़कों का निर्माण करने, हिमाचल में पर्यटन गलियारों के साथ सड़क सुरक्षा में सुधार लाने, फ्रूट बेल्ट में लॉजिस्टिक्स में वृद्धि करने, और अच्छा निष्पादन करने वाली सड़कें सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी एक कॉरपोरेट इनटिटी का सृजन करने के लिए सरकार की पहल की सहायता करने के लिए की जाने वाली पहलों का वित्तपोषण करेगी। परियोजना के तहत एक तिहाई रखरखाव अनुबंध महिला केंद्रित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को दिए जाएंगे।

भारत सरकार के वित मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग में अपर सचिव श्री समीर कुमार खरे ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का आर्थिक विकास वहां की सड़क अवसंरचना से घनिष्ठता से जुड़ा होता है। अपनी समृद्ध बागवानी एवं पर्यटन संभावना वाले हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय राज्य को सुनिर्मित, अच्छे संपर्क वाले, जलवायु अनुकूल तथा सुरक्षित सड़कों की आवश्यकता है। यह परियोजना राज्य को भरोसेमंद, लचीली और सुरक्षित सड़कों का विकास करने में सहायता करेगी जो राज्य के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

ऋण समझौते पर भारत सरकार की तरफ से श्री खरे, विश्व बैंक की तरफ से कंट्री डॉयरेक्टर (इंडिया) श्री जुनैद कमाल अहमद ने हस्ताक्षर किए जबकि परियोजना समझौते पर हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव श्री जगदीश चंद्र शर्मा ने हस्ताक्षर किया।

श्री अहमद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में उच्च-मूल्य बागवानी उत्पादों के उत्पादन की क्षमता है। बहरहाल, वैश्विक मूल्य श्रंखला में प्रतिस्पर्धात्मकता के अगले स्तर पर तेजी से छलांग लगाने के लिए राज्य को अपनी सड़कों तथा लॉजिस्टिक सेवाओं के सुधार पर फोकस करने की आवश्यकता है। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की सरकार को छोटे खेतिहर किसानों को घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुलभ कराने का बड़ा अवसर प्रदान करेगी, मूल्य श्रृंखला को बढ़ाने के लिए निजी निवेशों को आकर्षित करेगी तथा रोजगार एवं किसानों की आय में बढोतरी करेगी।

हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय राज्य है जो प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, इसे अक्सर भूस्खलनों तथा अचानक आने वाली बाढ़ों का सामना करना पड़ता है जो इसके सड़क संपर्क को प्रभावित करती है। बादल फटने, बेहद तेज वेग वाली नदियों एवं बाढ़ से भूस्खलन तथा बांधों काअपक्षरण होता है और सड़कों एवं पुलों को नुकसान पहुंचता है। जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की घटनाओं में अगले कुछ दशकों में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। भूस्खलनों तथा अचानक आने वाली बाढ़ों से सुरक्षा के लिए, यह परियोजना इंजीनियरिंग समाधानों को कार्यान्वित करेगी जो पौध एवं प्राकृतिक आधारित हैं तथा जलवायु जोखिमों पर ध्यान देने के लिए वाहनों के उत्सर्जन को भी नियंत्रित करेगी।

इसके अतिरिक्त, राज्य में कोई आरंभिक चेतावनी प्रणाली नहीं है, इसलिए भूस्खलनों से भयानक दुर्घटनाएं होती हैं। हिमपात एवं वर्षा के मौसम में कृषि उत्पादों और पर्यटकों का आवागमन या तो बंद कर दिया जाता है या उसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। एक इमर्जेंसी रिस्पांस क्रू का निर्माण करने, जलनिकासी संरचनाओं को अपग्रेड करने एवं ढलान प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा एक लचीली सड़क अवसंरचना के निर्माण में सहायता करेगी।

वरिष्ठ परिवहन इंजीनियर एवं परियोजना के लिए विश्व बैंक की टॉस्क टीम के लीडर श्री तेस्फामाइकल मितिकू ने कहा कि एक अच्छा निष्पादन करने वाली सड़क अवसंरचना, जो एक दक्ष लाजिस्टिक्स प्रणाली के निर्माण में सहायता करती है, छोटे खेतिहर किसानों, छोटे मझोले उद्यमों एवं विनिर्माण उद्योगों की निम्न लागत पर थोक तथा टर्मिनल बाजारों में ठीक समय पर उत्पादों की प्रदायगी करने में दीर्घकालिक रूप से मदद करेगी। हिमाचल प्रदेश सड़क एवं अन्य अवसंरचना विकास निगम (एचपीआरआईडीसी) एवं एचपी मोटर वीहिकल एडमिनिस्ट्रेशन का कारपोरेट इनटिटी के रूप में पुनर्गठन भी नवोन्मेषी विकास समाधानों को बढ़ावा देने में अधिक पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के साथ सहायक होगा।

यह देखते हुए कि सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, यह परियोजना प्रणालीगत तरीके से अहम सड़क सुरक्षा उपायों की पहचान, विश्लेषण, विकास एवं वरीयता देने की राज्य की क्षमता में वृद्धि करेगी जो सड़क का उपयोग करने वाले सभी लोगों को लाभान्वित करेगी। ‘सुरक्षित प्रणाली‘ दृष्टिकोण का चुने हुए जिलों एवं भार ट्रैफिक वाले गलियारों में अंगीकरण किया जाएगा। राज्य राजमार्ग गश्ती दल को प्रशिक्षित किया जाएगा तथा सर्विलांस गियर से लैस किया जाएगा। दुर्घटना के बाद की देखभाल तथा डाटा संग्रह के लिए समर्पित अस्पतालों के साथ दुर्घटना स्थलों को कनेक्ट करने में मदद करने के लिए एक इमर्जेंसी रिस्पांस प्रणाली की स्थापना की जाएगी।

अंतर्राष्ट्रीय पुनर्संरचना एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) से 82 मिलियन ऋण की पांच वर्षों की अनुग्रह अवधि सहित 15 वर्षों की अंतिम परिपक्वता है।

सौजन्य से: pib.gov.in

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