Wednesday, 8 July 2020

केंद्रीय मंत्री जल शक्ति ने जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की।

राज्य का वर्ष 2022 तक 100 प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करके का लक्ष्य।

केंद्रीय मंत्री जल शक्ति श्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तर प्रदेश, के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ से राज्य में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के संबंध में चर्चा की। भारत सरकार का प्रयास है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए बुनियादी सेवाएं प्रदान की जाएं। प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित गुणवत्ता का पीने योग्य पानी नियमित और दीर्घकालिक आधार पर उपलब्ध कराया जाए, जिसके लिए प्रमुख कार्यक्रम जल जीवन मिशन (जे०जे०एम०) चलाया गया है। इस मिशन का उद्देश्य सम्पूर्ण कवरेज है, यानी गांव के प्रत्येक परिवार को उनके घरों में कार्यशील नल जल कनेक्शन मिलना है।

उत्तर प्रदेश ने प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यशील नल कनेक्शन प्रदान करने के लिए, वर्ष 2022 तक 100 प्रतिशत कवरेज करने का लक्ष्य पूरा करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनायी है। इस सम्बंध में केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर राज्य में मिशन की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने राज्य में इस मिशन को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। मुख्यमंत्री ने विंध्य-बुंदेलखंड क्षेत्र में जेई/ एईएस के साथ-साथ आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित 38 जिलों में प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की राज्य की योजना का जिक्र किया।

ग्रामीण लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के मिशन के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने मौजूदा जलापूर्ति योजनाओं की रेट्रोफिटिंग करने व मौजूदा सार्वजनिक स्टैंड-पोस्ट से घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए अभियान चला कर यह काम शुरू करने का आग्रह किया ज़िससे वापस लौटने वाले प्रवासियों को भी उनके गाँव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। मुख्यमंत्री से जल सेवा वितरण की निगरानी के लिए आई०ओ०टी० आधारित सेंसर सिस्टम विकसित करने का आग्रह किया गया।

मंत्री श्री शेखावत ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य को सभी सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। जल जीवन मिशन के लिए भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए नल कनेक्शनों व केंद्रीय और समतुल्य राज्य के हिस्से के उपयोग के आधार पर निधि प्रदान की जाती है। जल शक्ति मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को राज्य को 100% एफ०एच०टी०सी० राज्य बनाने के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

उत्तर प्रदेश के 2.63 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से अब तक केवल 10.23 लाख परिवारों को नल कनेक्शन दिए गये हैं व अब वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश सरकार ने 1.02 करोड़ घरों में नल कनेक्शन देने की योजना बनायी है।

वर्ष 2020-21 में राज्य को 2,550.94 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और राज्य के हिस्से सहित 6,966.26 करोड़ रुपये की राज्य के पास सुनिश्चित उपलब्धता है। राज्य भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त आवंटन के लिए पात्र है। चूंकि उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग को 15वें वित्त आयोग अनुदान के तहत 9,752 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और इसका 50 प्रतिशत उपयोग जलापूर्ति और स्वच्छता के लिए किया जाना है। इसलिए केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वे ग्रामीण जलआपूर्ति, ग्रे-वाटर ट्रीटमेंट और पुन: उपयोग और विशेष रूप से जल आपूर्ति योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन व रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए इस कोष को उपयोग करने की योजना बनाएं।

केंद्रीय मंत्री ने ग्राम कार्य योजना (वी०ए०पी०) तैयार करने के साथ-साथ ग्राम पंचायत की उप समिति के रूप में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन करने पर भी जोर दिया जिसमें न्यूनतम 50 प्रतिशत महिला सदस्य होंगी। यह समिति गांव में जल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे की योजना, डिजाइन, कार्यान्वयन और संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगी। सभी गांवों को ग्राम कार्य योजना (वी०ए०पी०) तैयार करनी होगी जिसमें अनिवार्य रूप से पीने के पानी का विकास/ वृद्धि, ग्रे-वाटर मैनेजमेंट और ऑपरेशन और रख-रखाव शामिल होंगे। सभी गांवों में जल जीवन मिशन, सही मायने में जन आंदोलन बनाने के लिए सामुदायिक जुड़ाव के लिए आई०ई०सी० अभियान भी शुरू करने की जरूरत है। 

सरकार का प्रयास है कि मौजूदा कोविड-19 स्थिति के दौरान ग्रामीण परिवारों में प्राथमिकता के आधार पर नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीण लोगों को सार्वजनिक स्टैंड-पोस्ट से पानी लाने की परेशानी से न गुजरना पड़े।

सौजन्य से: pib.gov.in

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