Tuesday, 23 June 2020

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने मिजोरम में जल जीवन मिशन को तीव्र गति से लागू करने के लिए मिजोरम के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मिजोरम के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में जल जीवन मिशन (जेजेएम) की धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पिछले स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में इसकी घोषणा की थी, उसके बाद से राज्यों द्वारा जेजेएम को लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य 2024 तक चालू घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) के माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पीने का पानी उपलब्ध कराना है। यह मिशन ग्रामीण महिलाओं विशेषकर लड़कियों को सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने का एक साधन भी है।

बचे हुए परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा जलापूर्ति प्रणालियों को पुनःसंयोजन/बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ समय सीमा के अंदर जेजेएम के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सही योजना बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए, जल शक्ति मंत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्य के 655 गांवों में ‘अभियान मोड’ में तत्काल कार्यों की शुरुआत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए। सांसद आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत आने वाले आकांक्षी जिलों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति प्रमुख गांवों/बस्तियों और गांवों में संतृप्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

श्री शेखावत ने कहा कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए घरेलू नल कनेक्शन और इसके लिए किए गए धन के उपयोग के आधार पर धन उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 2019-20 में 23,525 घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध करने के लक्ष्य के प्रतिकूल, 15,878 नल कनेक्शन प्रदान किए गए। मिजोरम को 2019-20 में 39.87 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और उसके प्रदर्शन के आधार पर कुल 68.05 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, जिसमें से राज्य द्वारा केवल 37.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिससे 30.78 करोड़ रुपये बकाया रह गए। 2020-21 में मिजोरम के लिए आवंटन को बढ़ाकर 79.30 करोड़ रुपये कर दिया गया है और 30.78 करोड़ रुपये के शुरुआती बकाया के साथ, मिजोरम के पास केंद्रीय कोष के 110.08 करोड़ रुपये की उपलब्धता है। राज्य की हिस्सेदारी को शामिल करने के बाद, राज्य में जेजेएम के कार्यान्वयन के लिए 122.30 करोड़ रूपये उपलब्ध होंगे। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना राष्ट्रीय प्राथमिकता है और राज्य को समयबद्ध तरीके से इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक संवहनीयता के लिए जल स्रोतों के महत्व पर बल देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने पेयजल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक संवहनीयता के लिए मौजूदा पेयजल स्रोतों को मजबूत करने की सलाह दी। इस योजना को ग्रामीण स्तर पर किया जाना चाहिए और प्रत्येक गांव की ग्राम कार्य योजना (वीएपी) को विभिन्न कार्यक्रमों के सभी उपलब्ध संसाधनों के सामंजस्य के साथ तैयार किया जाना चाहिए जैसे कि मनरेगा, एसबीएम, पीआरआई को 15वें वित्त आयोग का अनुदान, कैम्पा फंड, जिला खनिज विकास कोष, स्थानीय क्षेत्र विकास निधि आदि। इस बात पर भी बल दिया गया है कि स्थानीय ग्राम समुदाय/ ग्राम पंचायतों और/ या उपयोगकर्ता समूहों को गांवों में जल आपूर्ति प्रणालियों की योजना, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रख-रखाव में शामिल करने की आवश्यकता है जिससे पेयजल सुरक्षा प्राप्त करने के लिए दीर्घकालिक स्थायित्व को सुनिश्चित किया जा सके। सभी गांवों में, जल जीवन मिशन को सही मायने में जन आंदोलन बनाने के लिए सामुदायिक जुड़ाव के साथ-साथ आईईसी अभियान की शुरुआत करने की आवश्यकता है।

2020-21 में, पीआरआई को 15वें वित्त आयोग द्वारा दिए गए अनुदान के रूप में, मिजोरम को 93 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और इस राशि का 50 प्रतिशत जल आपूर्ति एवं स्वच्छता के लिए अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाना है। स्वच्छ भारत मिशन (जी) के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली धनराशि का उपयोग ग्रे वाटर ट्रीटमेंट और पुन: उपयोग कार्यों के लिए किया जाना है।

कोविड-19 महामारी के मद्देनजर, यह महत्वपूर्ण है कि सार्वजनिक स्टैंड-पोस्ट/ सार्वजनिक जल स्रोतों पर लोगों की भीड़ इकट्ठा न हो। मिजोरम के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि वे घर में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए सभी गांवों में जलापूर्ति कार्य शुरू करें, जिससे सामाजिक दूरी का अभ्यास करने में मदद मिलेगी और इसके अलावा ग्रामीणों के लिए रोजगार प्राप्ति के अवसर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

जल शक्ति मंत्री द्वारा मिजोरम के मुख्यमंत्री को दिसंबर, 2022 तक राज्य को 100% एफएचटीसी राज्य बनाने के लिए पूरा समर्थन प्रदान करने का आश्वासन दिया गया और वे जल्द ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री के साथ जेजेएम योजना और कार्यान्वयन पर चर्चा करना चाहते हैं।

सौजन्य से: pib.gov.in

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