Thursday, 18 June 2020

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के उद्यम एनआरडीसी ने भारतीय नौसेना द्वारा विकसित नवरक्षक पीपीई सूट के विनिर्माण की तकनीकी जानकारी का लाइसेंस पांच सूक्ष्म व लघु उद्यमों को हस्तांतरित किया

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के उद्यम नेशनल रिसर्च डिवेलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी) ने भारतीय नौसेना के मुंबई स्थित आईएनएचएस अस्विनी अस्पताल से संबद्ध इंस्टीट्यूट ऑफ नेवल मेडिसिन के नवाचार प्रकोष्ठ द्वारा विकसित नवरक्षक नामक पीपीई सूट के विनिर्माण की तकनीकी जानकारी का लाइसेंस पांच सूक्ष्म व लघु उद्यमों: मैसर्स ग्रीनफील्ड विनट्रेड प्रा. लि. (कोलकाता), मैसर्स वैष्णवी ग्लोबल प्रा. लि. (मुंबई), मैसर्स भारत सिल्क्स (बेंगलुरु), मैसर्स श्योर सेफ्टी (इंडिया) लि. (बड़ोदरा) और मैसर्स स्वैप्स काउचर (मुंबई) को प्रदान किया है। ये लाइसेंस समूचे देश में गुणवत्तापूर्ण पीपीई किटों की मौजूदा व्यापक मांग की पूर्ति के लिए दिए गए हैं। इन विनिर्माताओं की प्रतिवर्ष 1 करोड़ से ज्यादा पीपीई सूट विनिर्माण की योजना है।

इस पीपीई का परीक्षण और प्रमाणन नाभिकीय औषधि तथा सम्बद्ध विज्ञान (इनमास), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है। यह प्रयोगशाला उन नौ एनएबीएल अनुमन्य प्रयोगशालाओं में से एक है जिसे भारत में मौजूदा समय में कपड़ा मंत्रालय द्वारा आईएसओ के वर्तमान मानकों और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा कपड़ा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार पीपीई प्रोटोटाइप सैम्पल टेस्टिंग के लिए अधिकृत किया गया है। इसके साथ ही इस प्रयोगशाला को कपड़ा, सूट और सिलाई जोड़ के लिए कृत्रिम रक्त भेदन प्रतिरोध कसौटी को पूरा करने में समर्थ पाया गया है। यह किफायती भी है क्योंकि इसमें किसी बड़े पूंजी निवेश की आवश्यकता नहीं और बुनियादी सिलाई दक्षता का इस्तेमाल करके कोई सामान्य गाउन विनिर्माण इकाई के द्वारा भी इसे अपनाया जा सकता है। यह प्रौद्योगिकी और कपड़े की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि पीपीई सूट की सीवन की सीलिंग की कोई जरूरत नहीं होती। इस प्रकार महंगी सीलिंग मशीनों और टेप को आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यहां तक कि पीपीई के कपड़े में पॉलिमर या प्लास्टिक जैसी फिल्म के लैमिनेशन की भी जरूरत नहीं रह जाती है। इस तरह से विनिर्मित पीपीई का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की त्वचा से ऊष्मा और नमी पीपीई से बाहर निकलती रहती है। यह प्रौद्योगिकी सुरक्षा तो प्रदान करती ही है, लेकिन साथ ही साथ इस्तेमाल करने वाले को असुविधा न हो, इसका ध्यान भी रखा गया है। इस पीपीई का यह अनोखापन इसे उन अन्य पीपीई से अलग बनाता है जो वर्तमान कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौर में उपयोग में लाए जा रहे हैं।

इस्तेमाल करने वाली परिस्थितियों से जुड़ी आवश्यकताओं के अनुसार एक परत के साथ- साथ दोहरी परत में भी ये पीपीई सूट उपलब्ध हैं। यह एक हेड गियर, फेस मास्क और जांघ के मध्य भाग तक जूतों के कवर के साथ भी आता है।

नवरक्षक पीपीई सूट को नौसेना के एक चिकित्सक द्वारा डिजाइन किया गया है जिसमें उन्होंने चिकित्सकों की सहूलियत और सुरक्षा के लिए पीपीई के इस्तेमाल में अपने व्यक्तिगत अनुभव को समाहित किया है। इस पीपीई सूट में संवर्धित श्वसन घटक उन अग्रिम पंक्ति योद्धाओं के लिए आकर्षक साधन के रूप में है जिन्हें ये सूट घंटों तक पहनना पड़ता है और काम के दौरान अत्यंत कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

रक्षा मंत्रालय के गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए), रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय भारत सरकार, का बौद्धिक संपदा सुविधा प्रकोष्ठ, भारतीय नौसेना और एनआरडीसी इस नवरक्षक पीपीई सूट की बौद्धिक संपदा संबंधी सुरक्षा एवं इसके व्यवसायीकरण के लिए मिलकर काम करेंगे । चूंकि बिना परत चढ़े अनकोटेड ; बिना लैमिनेशन वाले; अनलैमिनेटेड और बिना टेप लगे; अनटेप्ड पीपीई के प्रयोग की संकल्पना पहली बार सामने आई है, तथा पहले ऐसे पीपीई इस्तेमाल में नहीं थे, ऐसे में इस नवाचार को बौद्धिक संपदा अधिकारों संबंधी सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता थी। आविष्कारक द्वारा नवरक्षक पीपीई के लिए एनआरडीसी के माध्यम से पेटेंट फाइल किया गया है। नवरक्षक पीपीई की प्रौद्योगिकी एक साथ अनेक समस्यायों का समाधान प्रस्तुत करती है व बड़े पूंजी निवेश की आवश्यकता के बगैर यह विनिर्माण को आसान बनाती है। इसमें कोटिंग और टेपिंग संबंधी उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए इसमें विदेशों से आयातित और महंगी मशीनों की जरूरत भी नहीं है। यह पीपीई सूट इस्तेमाल करने वाले को सुरक्षा के साथ सहूलियत भी प्रदान करता है और सबसे महत्वपूर्ण बात, इस प्रौद्योगिकी से देश की आत्मनिर्भरता में अभिवृद्धि भी होती है। भविष्य में, ऐसा भी हो सकता है कि यह साधारण परंतु अत्यंत कारगर पीपीई सूट पीपीई का एक अहम मानक बन जाए।

सौजन्य से: pib.gov.in

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