Wednesday, 5 February 2020

केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के मिले बेहतर परिणाम

दूसरे चरण में 2 साल में किसानों को 11.69 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित

रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में आई 10 प्रतिशत तक की कमी

उर्वरकों के उपयोग से मृदा में मौजूद पोषक तत्‍वों में होने वाली कमी दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2014-15 में मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना' के बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। योजना के दूसरे चरण में बीते दो साल में कृषि मंत्रालय द्वारा किसानों को 11.69 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर के निर्देशन में मंत्रालय द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं। इन कार्डों की सहायता से देश के किसान अपने खेत की मिट्टी के बेहतर स्वास्थ्य और उर्वरता में सुधार के लिए पोषक तत्वों को उचित मात्रा में उपयोग करने के साथ ही मिट्टी की पोषक स्थिति की जानकारी हासिल कर रहे हैं।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एन.पी.सी) द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर सिफारिशों के तहत रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 8 से 10 प्रतिशत तक की कमी आई है,साथ ही उपज में 5-6 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।

केंद्र सरकार द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण चक्र- I (वर्ष 2015 से 2017) में 10.74 करोड़ कार्ड, चक्र- II (वर्ष 2017-2019) में 11.69 करोड़ कार्ड दिए गए हैं।

चालू वित्तीय वर्ष के दौरान आदर्श गांवों का विकास नामक पायलेट प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसानों की सहभागिता से कृषि जोत आधारित मिट्टी के नमूनों के संग्रहण और परीक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन हेतु प्रत्येक कृषि जोत पर मिट्टी के नमूनों के एकत्रीकरण एवं विश्लेषण हेतु हरेक ब्लॉक में एक-एक आदर्श गांव का चयन किया गया है। इसके अंतर्गत किसानों को 2019-20 में अब तक 13.53 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।

मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना हेतु, योजना के तहत राज्यों को अब तक 429 नई स्टेटिक लेब, 102 नई मोबाइल लेब, 8752 मिनी लेब, 1562 ग्रामस्तरीय प्रयोगशाला की स्थापना और 800 मौजूदा लेब के सुदृढ़ीकरण की मंजूरी दी गई हैं।

योजना के तहत मृदा की स्थिति का आकलन नियमित रूप से राज्य सरकारों द्वारा हर 2 साल में किया जाता है, ताकि पोषक तत्वों की कमी की पहचान के साथ ही सुधार लागू हो सकें। योजना की वेबसाइट www.soilhealth.dac.gov.in पर farmer's corner में दिए लिंक द्वारा किसान अपने खेत की मिट्टी के नमूने को ट्रेक करने के साथ-साथ अपने सॉयल हेल्थ कार्ड की प्रति भी प्राप्त कर सकते हैं।

मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन योजना जहां एक ओर किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, वहीँ ग्रामीण युवाओं के लिए यह रोजगार का माध्यम भी बनी है। योजना के अंतर्गत ग्रामीण युवा एवं किसान जिनकी उम्र 40 वर्ष तक है, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना एवं नमूना परीक्षण कर सकते हैं। प्रयोगशाला स्थापित करने में 5 लाख रूपए तक का खर्च आता हैं, जिसका 75 प्रतिशत केंद्र एवं राज्य सरकार वहन करती है। स्वयं सहायता समूह, कृषक सहकारी समितियां, कृषक समूह या कृषक उत्पादक संगठनों के लिए भी यहीं प्रावधान है।

इच्छुक युवा किसान या संगठन अपने जिले के उपनिदेशक, (कृषि), संयुक्त निदेशक कृषि को अथवा उनके कार्यालय में प्रस्ताव दे सकते हैं। वेबसाइट agricoop.nic.in या soilhealth.dac.gov.in पर या किसान कॉल सेंटर (1800-180-1551) पर सम्पर्क कर भी अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं।

सौजन्य से: pib.gov.in

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