Monday, 9 December 2019

डॉ जितेन्द्र सिंह ने भारत के संविधान के इतिहास पर डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधान मंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज नई दिल्ली में भारत के संविधान के इतिहास पर डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी का आयोजन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने संसद संग्रहालय और लोक सभा सचिवालय अभिलेखागार तथा लोक संपर्क और संचार ब्यूरो के सहयोग से किया है। यह प्रदर्शनी नई दिल्ली के नार्थ ब्लॉक के 8 नम्बर गेट पर 9 से 10 दिसंबर, 2019 तक चलेगी। प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर डीओपीटी के सचिव डॉ. सी. चन्द्रमौली और डीओपीटी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनकर गौरव का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टि से 9 दिसंबर का दिन बहुत अहम है, क्योंकि 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष संविधान को अपनाए जाने के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मौलिक अधिकारों के साथ मौलिक कर्तव्यों के निर्वहन पर विशेष बल देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने जीवन में सामूहिक रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो इससे राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्य पूरे होंगे।

डॉ. सिंह ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और डीओपीटी के अधिकारियों को राष्ट्रीय शपथ दिलाई। प्रदर्शनी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह इतिहास में झांकने का दुर्लभ अवसर है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी न सिर्फ गागर में सागर की उक्ति को चरितार्थ करती है, बल्कि इसके जरिये स्वतंत्रता से संप्रभु गणराज्य बनने की देश यात्रा भी दिखाई गई है।

प्रदर्शनी में संविधान सभा के सदस्यों की फोटो, संविधान सभा में होने वाली बहसों (श्रव्य), संविधान के निर्माण पर फिल्म, संविधान सभा के सदस्यों के उद्धरण और व्याख्यानों, संविधान की प्रतिकृति, संविधान की प्रस्तावना, मौलिक कर्तव्यों, निदेशक सिद्धांतों इत्यादि पर पोस्टरों को रखा गया है।

ऐतिहासिक दृष्टि से 9 दिसंबर का दिन बहुत अहम है, क्योंकि 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी। 29 अगस्त, 1947 को संविधान सभा ने एक प्रस्ताव के जरिये मसौदा समिति का गठन किया था ताकि संवैधानिक सलाहकार द्वारा तैयार किये जाने वाले संविधान के मसौदे की जांच की जाए। इसके तहत संविधान सभा द्वारा लिये गए सभी निर्णयों को प्रभावी बनाया गया, जिनमें संविधान में शामिल किये जाने वाले सभी सहायक विषयों को शामिल किया गया था। समिति से कहा गया था कि संविधान के मसौदे पर गौर करने के लिए उसे संविधान सभा के समक्ष पेश किया जाए।

भारत के संविधान को 26 नवम्बर, 1949 को अपनाया गया और सदस्यों ने 24 जनवरी, 1950 को उस पर अपने हस्ताक्षर किए। संविधान की प्रति पर 284 सदस्यों (कुल सदस्यों की संख्या 299) ने हस्ताक्षर किये थे। भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हो गया था। संविधान को अपनाने वाले दिन को देश में ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है।

सौजन्य से: pib.gov.in

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