Thursday, 1 October 2020

भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि क्षेत्र का रहेगा प्रमुख योगदान, देश में किए जा रहे कृषि सुधार बनेंगे समग्र विकास का आधार - केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर

जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुरूप, वर्ष 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि क्षेत्र का प्रमुख योगदान रहेगा। देश में हो रहे कृषि सुधार समग्र विकास का आधार बनेंगे।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने यह बात जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के 57वें स्थापना दिवस समारोह में आज कही। श्री तोमर ने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में, कृषि प्रधान देश होने के नाते किसानों के साथ ही कृषि से जुड़े वैज्ञानिकों-कर्मचारियों, मैदानी कार्यकर्ताओं का प्रमुख योगदान होगा। खेती-किसानी में लागत कम करने के साथ ही उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाए बिना इस लक्ष्य की पूर्ति संभव नहीं है। कृषि विश्वविद्यालयों को इसके लिए समुचित तकनीक एवं प्रचार-प्रसार माध्यमों का उपयोग करने हेतु आवश्यक तंत्र विकसित कर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी देना होगा। देश की जीडीपी में कोरोना संकट के कठिन दौर में भी कृषि क्षेत्र ने सकारात्मक योगदान दिया है।

श्री तोमर ने कहा कि वर्ष 2009-10 में जहां देश में कृषि मंत्रालय का बजट बारह हजार करोड़ रुपये होता था, अब ये एक लाख चौंतीस हजार करोड़ रुपये हैं। मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने एमएसपी में भी बढ़ोतरी की है, वहीं राज्यों को योजनाओं में ज्यादा फंड दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ बजट प्रवर्तित योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि अलग-अलग विधाओं को अपनाना होगा। देश में 86 प्रतिशत छोटे किसान हैं, जिनके पास गांवों तक निजी निवेश पहुंचने से ही नई कृषि क्रांति का सूत्रपात होगा। इसीलिए, प्रधानमंत्री ने 6,850 करोड़ रुपये के बजट से दस हजार नए एफपीओ बनाने की स्कीम शुरू की है। गांव-गांव किसानों को जागरूक कर एफपीओ से जोड़ा जाएं। किसान सिर्फ फसल उगाने में ही पसीना नहीं बहाएं, बल्कि महंगी फसलों को उगाएं, फूड प्रोसेसिंग से जुड़े, वैल्यूचैन गांव-गांव तक खड़ी हो, इनमें एफपीओ का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र के गैप्स को भरने के लिए प्रधानमंत्री ने एक लाख करोड़ रुपये के एग्री इंफ्रा फंड की शुरूआत की है। आत्मनिर्भर भारत अभियान में अन्य सम्बद्ध क्षेत्रों के पैकेज भी दिए गए हैं, इन सबसे यह धारणा दूर हुई है कि किसानों को लोन आसानी से नहीं मिल पाता। पैकेज का यह पैसा गांव-गांव पहुंचेगा, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा, जिससे कृषि विभिन्न आयामों से जुड़ेगी। उन्होंने कहा कि कृषि सुधार के नए कानून बनने व बदलाव से आने वाले कल में किसान बेचारा नहीं होगा, बल्कि मार्गदर्शन करने वाला होगा। किसानी का काम देश के विकास में अधिकतम योगदान करने वाला हो, इस दिशा में सबको आगे बढ़ने की जरूरत है और किसान, केवीके, कृषि के छात्र-छात्राएं व वैज्ञानिकों का योगदान महत्व रखता हैं।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश में खेती काफी अग्रणी स्थिति में है। मध्य प्रदेश को सोयाबीन राज्य के रूप में भी जाना जाता है। इसमें इस वि.वि. ने अपने शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से बेहतर योगदान दिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति पिछले दिनों आई और खुशी की बात है कि इसके माध्यम से उच्च शिक्षा में सुधार के लिए इस वि.वि. के स्तर पर समितियां गठित कर मूर्त रूप देने का कार्य शुरू कर दिया गया है। शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने, व्यवस्थित विकास करने व इसके प्रबंधन के लिए भारत सरकार कृत संकल्पित है। कृषि-मेघ, कृषि के पूर्व छात्रों का सूचना तंत्र एलुमिनी नेट तथा ऑनलाइन एक्रिडेशन सिस्टम का प्रारंभ इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अनुसंधान के महत्वपूर्ण तथ्य-आंकड़ों को सुरक्षित रखते हुए, कभी भी-कहीं से भी उस तक पहुंच तथा सभी के लिए उपलब्धता डिजिटल वर्ल्ड में संभव हो सकी है। अत्याधुनिक तकनीक जैसे- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप लर्निंग, इमेज एनालिसिस आदि का उपयोग अब कृषि में भी होगा, जिसका लाभ हम सबको मिलेगा। राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत इस वि. वि. में भी स्पेशल डाटा एप्लिकेशन इन एग्रीकल्चर पर एडवांस सेंटर शुरू हुआ है। श्री तोमर ने आशा व्यक्त की कि इन उच्च तकनीकों को सरल करते हुए इन्हें किसानों की उपज के बाजारीकरण व आय बढ़ाने में उपयोगी बनाकर प्रचारित किया जाएगा तथा अनुसंधान से खेती में आने वाली चुनौतियों पर विजय प्राप्त करनी होगी।

कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि जनेकृविवि द्वारा विकसित फसलों की सैकड़ों किस्में देश-विदेश में सफलतापूर्वक उगाई जा रही है। यहां के विद्यार्थियों ने विश्व में नाम रोशन किया है। 6 दशकों में सर्वश्रेष्ठ कृषि वि.वि. सहित अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। प्रजनक बीज उत्पादन में 15 साल से देश में अव्वल है।

कार्यक्रम में म.प्र. के कृषि मंत्री श्री कमल पटेल का संदेश पढ़कर सुनाया गया। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.के. गुप्ता व डॉ. गोविन्द्र सिंह राजपूत को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड तथा डॉ. एस.के. राव, डॉ. सुरेश कुमार चौधरी व डॉ. रवि दुबे को जवाहर रत्न अवॉर्ड दिया गया। श्री शैलेंद्र कौरव (छिंदवाड़ा) व श्री राव गुलाब सिंह लोधी (नरसिंहपुर) को कृषक फेलो सम्मान-2020 और श्रीमती लक्ष्मी परते (बैतूल), श्रीमती कौशल मरकार (बालाघाट) एवं श्रीमती कोमलबाई (पन्ना) को उत्कृष्ट आदिवासी कृषक सम्मान-2020 से सम्मानित किया गया। द्वितीय चरण (तकनीकी सत्र) में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने स्थापना दिवस व्याख्यान दिया। अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) डॉ. अमित कुमार शर्मा ने संचालन तथा कुलसचिव श्री रेवा सिंह सिसौदिया ने आभार प्रदर्शन किया।

सौजन्य से: pib.gov.in

No comments:

Extension of Emergency Credit Line Guarantee Scheme through ECLGS 2.0 for the 26 sectors identified by the Kamath Committee and the healthcare sector

Extension of the duration of Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) 1.0 The Government has extended Emergency Credit Line Guarantee ...