Thursday, 27 February 2020

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत चालू वित्त वर्ष में 80,000 सूक्ष्म उद्यमों की सहायता की जाएगी

रोजगार जुटाने वाली एमएसएमई की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा के लिए बैठक का आयोजन

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री श्री नितिन गडकरी और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सभी बैंकों के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें कम पूंजी निवेश से भारी संख्या में रोजगार जुटाने वाली एमएसएमई मंत्रालय की कुछ प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की गई। इस बैठक में एमएसएमई मंत्रालय की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) पर ध्यान केन्द्रित किया गया। इसके अलावा, एमएसएमई को मदद देने का मार्ग खोजने के लिए एमएसएमई ऋणों के पुनर्गठन के मुद्दे के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। 

पीएमईजीपी एक क्रेडिट से जुड़ी सहायता योजना है जो सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देती है। इसमें एमएसएमई मंत्रालय के माध्यम से सरकार विनिर्माण क्षेत्र में 25 लाख और सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 35 प्रतिशत तक छूट देती है। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने पिछले वर्षों में इस योजना के तहत बड़ी संख्या में उद्यमों की स्थापना में मदद करने के लिए बैंकों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। पिछले वित्तीय वर्ष में ऐसे उद्यमों की सहायता में दो गुनी बढ़ोत्तरी हुई है और 73,000 सूक्ष्म उद्यमों की सहायता की गई।

इस योजना को और बढ़ावा देने के लिए चालू वित्त वर्ष में 80,000 इकाइयों के प्रतिष्ठानों की सहायता करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक 46,000 इकाइयों को विभिन्न बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसके अलावा बैंकों से 15 मार्च तक 1.18 लाख लंबित ऋण आवेदनों का निपटान करने के लिए अनुरोध किया गया है। बैंकों से पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है।

बैंकों द्वारा खारिज किए गए आवेदनों के डेटा विश्लेषण से पता चला कि 11 प्रतिशत प्रस्ताव खारिज कर दिए जाते हैं क्योंकि पीएमईजीपी के तहत स्थानीय बैंकों द्वारा लक्ष्य पूरे कर लिए जाते हैं। इस मुद्दे को हल करने के लिए, बैंकों से अनुरोध किया गया कि वे योजना के तहत ऋण में वृद्धि करें और न्यूनतम लक्ष्य तय करने की अपनी नीति को संशोधित करें, ताकि सभी योग्य आवेदनों की ऋण मंजूरी पर विचार किया जा सके। क्रेडिट गारंटी योजना की पहुंच बढ़ाने पर बैंकों के साथ विचार-विमर्श किया गया। सरकार ने इस योजना के तहत क्रेडिट गारंटी 50,000 करोड़ बढ़ाने का लक्ष्य रखा है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 67 प्रतिशत अधिक है। बैंकों ने कहा कि इस योजना के तहत ऋण की भारी मांग है और वे इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आश्वस्त हैं।

वित्त मंत्री और एमएसएमई मंत्री ने प्रारंभिक चरण में भुगतान न हुए ऋणों का उपयुक्त रूप से पुनर्गठन करके एमएसएमई को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सभी सीएमडी अपने भुगतान न हुए ऋणों के पुनर्गठन में एमएसएमई का समर्थन करने के लिए सहमत हुए। बैठक इस उम्मीद के साथ समाप्त हुई कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए की गई ये पहल इस क्षेत्र को सहायता प्रदान करने में एक लंबा रास्ता तय करेंगी और इनसे रोजगारों के अवसर बढ़ेंगे। बैंकरों के साथ यह बैठक स्पष्ट रूप से एमएसएमई क्षेत्र की मदद करने में सरकार के संकल्प और प्रयासों को दर्शाती है क्योंकि यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

सौजन्य से: pib.gov.in

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