Thursday, 12 July 2018

Text of PM’s speech during his interaction with the members of Self Help Groups across the country through video bridge


नमस्ते।


आप आज इतनी बड़ी तादाद में मुझे आशीर्वाद देने के लिये आए दूर दूर अपने गांव से आज करोड़ों माताएं बहनें मुझे आशीर्वाद दे रही हैं। कौन होगा जिसको एक सौभाग्य के कारण ऊर्जा न मिलती हो काम करने की हिम्मत न मिलती हो। ये आप ही लोग हैं जिसका आशीर्वाद जिसका प्यार मुझे देश के लिये कुछ न कुछ करने के लिये हमेशा नई ताक़त देता रहता है। आप सब अपने आप में संकल्प के धनी हैं। उद्यमशीलता के लिये समर्पित हैं। और आप टीम रूप में कैसे काम किया जाये,एक सामूहिक प्रयास कैसे किया जाए। मैं समझता हूं दुनिया की बड़ी – बड़ी यूनिवर्सिटीज़ को ये मेरे हिन्दुस्तान की गरीब माताएं – बहनें जिनको शायद बहुत कम लोगों को पढ़ने का सौभाग्य मिला है, लेकिन वे टीम Spirit क्या होता है, मिलजुलकर के काम कैसे करना होता है,काम का बंटवारा कैसे करना होता है शायद ही इसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।

महिला सशक्तिकरण की जब हम बात करते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है, महिलाओं को स्वयं की शक्तियों को, अपनी योग्यता को,अपने हुनर को पहचानने का अवसर उपलब्ध हो। महिलाओं को कुछ सिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके भीतर बहुत सी चीजें होती हैं। लेकिन उनको अवसर नहीं मिलता है। जिस दिन हमारी माताओं – बहनों को अवसर मिल जाता है,वो कमाल करके दिखा देती है सारी बाधाओं को पार कर देती है। और महिलाओं की ताकत देखिए क्या कुछ नहीं संभालती है वो सुबह से रात तक देखिए और कितना टाइम मैनेजमेंट परफेक्ट हो ता है उसका, अपने परिवार का गांव,समाज का जीवन बदलने के लिये उससे जो हो सकता है वो हमेशा करती है। हमारी देश की महिलाओं में सामर्थ्‍य है और सफलता के लिये कुछ कर गुजरने की ताकत भी रखती है,संघर्ष करने का हौसला भी है। जब भी महिलाओं का आर्थिक सामर्थ्‍य बढ़ा है। और मैं मानता हूं की महिलाओं के सशक्तिकरण में एक सबसे बड़ी बात होती है कि वो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। जिस दिन महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती है, तो वो assertive बनती हैं, परिवार में भी assertive बनती हैं, बच्‍चों को भी कहती हैं ये करो; ये मत करो,पति को भी कह सकती है ये करो; ये मत करो और इसलिये महिलाओं का आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना हर निर्णय की भागीदारी बढ़ाने के लिये एक बहुत बड़ा कारण बनता है। और इसलिये हम लोगों का प्रयास रहना चाहिए। महिलाओं में जब आर्थिक सामर्थ्‍य बढ़ता है,उसके सामाजिक जीवन में जो कुरीतियां हैं उस पर भी प्रभाव पड़ता है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं,तो जो सामाजिक बुराइयां और जो कभी – कभी उसको सामाजिक बुराइयों से कॉम्‍प्रोमाइज़ करना पड़ता है, झुकना पड़ता है, न चाहते हुए भी बुराइयों को स्वीकार करना पड़ता है। अगर आर्थिक सामर्थ्‍य है,तो वो बुराइयों के खिलाफ जूझने के लिये तैयार हो जाती है। आज आप किसी भी सैक्टर को देखें,तो आपको वहां पर महिलाएं बहुत बड़ी संख्या में काम करती हुई दिखेंगी। कोई कल्पना कर सकता है कि हमारी माताओं – बहनों के बिना पशुपालन का काम हो सकता है,कोई कल्पना कर सकता है कि हमारी माताओं – बहनों के योगदान के बिनाहमारा कृषि क्षेत्र चल सकता है। बहुत कम लोगों को मालूम है,गांव में जाकर के देखे तो पता चलेगा कि खेती का कितना बड़ा काम हमारी माताएं बहनें करती हैं। पशुपालन तो एक प्रकार से शत-प्रतिशत आज देश में जो दूध उत्पादन होता है,मैं मानता हूं शत-प्रतिशत हमारी माताओं बहनों का योगदान है। पशुपालन में परिश्रम है उसी का परिणाम है और इसलिये हमारी हमारी माताएं-बहनें खासकर के गांव में, ग्रामीण क्षेत्र में,जो रहती हैं और उनके उद्यम से लेकर कई जरूरतों को पूरा करने के लिये गांव-गांव में सामूहिक उद्यमों के क्‍लस्‍टर को बढ़ावा मिला है और ज्यादा मिलता चले जा रहा है। इन प्रयासों को गति मिले, उसके दायरे का विस्तार हो,अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिले।
भारत सरकार दीनदयाल अंत्योदय योजना,
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन इसके तहत इसको सुनिश्चित करने के लिये काफी प्रयास कर रही है। हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्यमियों के लिये श्रमिकों के लिए सेल्फ हेल्प यूथ,स्वसहायता यूथ और मैंने देखा है बिल्कुल पढ़ी लिखी महिला नहीं होगी उसको सेल्फ हेल्प ग्रुप का मतलब क्या है उसको समझ आता है वो अंग्रेजी में बोल लेती है। ये शब्द इतना नीचे तक पहुंच गया है। कभी स्वसहायता ग्रुप कहें तो वो सोचती है कि मैं क्या बोल रहा हूं। इतना वो पोप्युलर हो गया है। ये हमारे सेल्फ हेल्प ग्रुप एक तरह से गरीबों खास कर के महिलाओं के आर्थिक उन्नति का आधार बनी है। ये ग्रुप महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं। उन्हें आर्थिक और सामाजिक तौर पर मजबूत भी बना रहे हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत देश भर के ढाई लाख ग्राम पंचायतों में करोड़ों करोड़ों ग्रामीण गरीब परिवारों तक उन्होंने पहुंचने का प्रयास किया है, सफल प्रयास किया है। उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने लक्ष्य रखा गया है। इस योजना को सभी राज्यों में शुरू किया गया है। और मैं सभी राज्यों और वहां के अधिकारियों का भी अभिनन्दन करना चाहूंगा। जिन्होंने इस योजनाओं में लाखों करोड़ों महिलाओं तक पहुंचाकर उनके जीवन में सुधार लाने का काम किया है। और मैं तो जो District लेवल पर हमारे काम करने वाले अफसर हैं उनसे आग्रह करूंगा कि अपने District में ऐसे जो काम होते हैं। उनकी जो इमोशनल स्टोरी होती है। एकआ किताब लिखनी चाहिए। वो सरकारी जो डोक्युमेंट है वैसा नहीं आप देखि‍ए उन अधिकारियों को भी या उनके परिवारजनों को भी एक आनन्द आएगा कि कैसा अद्भुत काम हो रहा है। आपको जानकर के बहुत आश्चर्य होगा कि अब तक महिलाओं के करीब 45 लाख सेल्फ हैल्प ग्रुप बनाए गए और जिनसे तकरीबन पांच करोड़ महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। एक तरह से पांच करोड़ परिवारों के लिये एक और कमाने वाले व्यक्ति का इजाफा हुआ है। जिससे एक और इन्कम का सोर्स तैयार हुआ है। मैं आपको कुछ आंकड़े बताना चाहता हूं।

2011 से 2014 हमारी सरकार बनने के पहले अगर 2011 से 2014 तक जो कोई भी प्रगति हुई उसको अगर देखें तो पांच लाख सेल्फ हैल्प ग्रुप बने थे। और सिर्फ 50-52 लाख परिवारों को सेल्फ हैल्प ग्रुप से जोड़ा गया था। हमारी सरकार बनने के बाद 2014 से 2018 तक इस काम को प्राथमिकता दी गई इस काम का महत्व माना गया और गत चार वर्ष में 20 लाख से अधिक नए सेल्फ हैल्प ग्रुप बने हैं और सवा दो करोड़ से अधिक परिवारों को सेल्फ हैल्प ग्रुप से जोड़ा गया है। यानी पहले की तुलना में सेल्फ हैल्प ग्रुप चार गुना बढ़े हैं। और चार गुना अधिक परिवारों को इससे लाभ भी मिला है। यही दर्शाता है इस सरकार की काम करने की गति और जनकल्याण के लिये हमारी कितनी प्रतिबद्धता है,माताओं का सशक्तिकरण हमारी कितनी प्राथमिकता है। इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं के ग्रुप को ट्रैनिंग से लेकर के फंडिंग  और मार्केटिंग से लेकरके स्किल डेवलपमेंट में हर प्रकार की मदद दी जाती है।

जैसा कि मैंने पहले बताया था कि देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से सेल्फ हैल्प ग्रुप के एक सदस्य आज हमारे साथ हैं। मैं फिर एक बार देश के आर्थिक विकास में भागीदारी करने वाले,परिवार के आर्थिक जीवन में योगदान देने वाले और नए नए तौर तरीकों से कम से कम खर्च से काम करने वाले, टीम बनाकर के काम करने वाले, फॉर्मल एजुकेशन हुआ हो या न हुआ हो फिर भी इस प्रकार की सफलता पर कार्य वाली इन सभी माताओं – बहनों को सुनने के लिये मैं बहुत आतुर हूं।
देखिए कितना बदलाव आया है इन सभी के जीवन में,
सेल्फ हैल्प ग्रुप कितनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसका जीता-जागता उदाहरण हमें यहां देखने को मिला है। सेल्फ हैल्प ग्रुप का ये नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। अलग-अलग क्षेत्रों और व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। सरकार उन्हें आगे बढ़ाने के लिये आवश्यक ट्रैनिंग,आर्थिक मदद और अवसर भी उपलब्ध करती है।

सेल्फ हैल्प ग्रुप के माध्यम से एक प्रयोग महिला किसान और कृषि क्षेत्र में किया गया है। इसमें महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना पर की गई जिसके तहत 33 लाख से अधिक महिला किसानों को ट्रैनिंग दी गई। इसके साथ-साथ 25 हजार से अधिक Community Livelihood Resource Person भी चुने गए। जो ग्रामीण स्तर पर 24x7सपोर्ट उपलब्ध करवा रहे हैं। आज कोई भी क्षेत्र हो खासकर कृषि से जुड़े क्षेत्रों में वैल्यु एडिशन,मूल्यवृद्धि ये काफी महत्वपूर्ण हो गया है। मुझे खुशी है कि आज देश के किसान मूल्यवृद्धि में वैल्यु एडिशन का महत्व समझने लगे हैं। इसे अपना रहे हैं और उन्हें इसका लाभ भी मिल रहा है। कई राज्यों में कुछ विशेष उत्पाद जैसे मक्का, आम, फूलों की खेती,डेरी आदि के लिये वैल्यु चेन approach  को अपनाया गया है। इसके लिये सेल्फ हैल्प ग्रुप से दो लाख सदस्यों को सपोर्ट किया गया है। अभी हमने पाटलिपुत्र,बिहार से अमृता देवीजी को सुना और जाना कि कैसे सेल्फ हैल्प ग्रुप से जुड़ने के बाद वहां के गरीब महिलाओं के जीवन में परिवारों में कैसे बदलाव आया। मैं बिहार के ही कुछ और उदाहरण आपको बतलाता हूं। वहां सेल्फ हैल्प ग्रुप के ढाई लाख से अधिक सदस्य प्रशिक्षण प्राप्त कर धान की बेहतर तरीके से खेती कर रहे हैं। इसी तरह लगभग दो लाख सदस्य नये तरीकों से सब्जी की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा बिहार में लाख की चूड़ियां बनाने के लिये Cluster भी स्थापित किये गए हैं और प्रोड्युसर ग्रुप बनाया गया है। यह गर्व की बात है कि वहां की चूड़ियां अपने डिजाइन के लिये हमारे देश में और देश के बाहर में भी प्रसिद्ध है। अभी जैसा कि छत्तीसगढ़ से मीना मांझी नेबताया कि कैसे ईंट निर्माण से उन्हें अपने जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिली। वहां ईंट बनाने के लिये कई यूनिट स्थापित किये गए हैं। करीब 2000 सेल्फ हैल्प ग्रुप्स इससे जुड़े हुए हैं। हम सबको जानकर के सुखद आश्चर्य होता है कि इनका सालाना प्रोफिट करोड़ों रुपयों में पहुंचा है। इसी तरह छत्तीसगढ़ के 22 जिलों में 122 बिहान बाजार आउटलेट बनाए गए हैं,जहां सेल्फ हैल्प ग्रुप के 200 वैराइटी के प्रोडक्ट बेचे जाते हैं।

छत्तीसगढ़ से जुड़ा मैं अपना एक व्यक्तिगत अनुभव आप लोगों के साथ शेयर करना चाहता हूं। शायद आपलोगों ने टीवी पर देखा होगा कुछ दिन पहले मैं छत्तीसगढ़ गया था,जहां मुझे ई-रिक्शा में सवारी करने का अवसर मिला। वो ई-रिक्शा एक महिला चला रही थी। छत्तीसगढ़ का वो इलाका पहले नक्सलवाद,माओवाद की हिंसा से ग्रस्त था। वहां पर आने-जाने का कोई साधन नहीं था। लेकिन सरकार ने इस समस्या को दूर करने का प्रयास किये। और इसी का परिणाम है कि आज वहां कई ई-रिक्शा चल रहे हैं। देश में कई दुर्गम ग्रामीण इलाके ऐसे हैं,जहां पर आवाजाही के लिये वाहन उपलब्ध नहीं है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण परिवारों को इन इलाकों में वाहन खरीदने के लिये धन उपलब्ध कराया गया। इससे आवागमन तो आसान हुआ बल्कि साथ-साथ ये ग्रामीण परिवारों के लिये आय का एक बहुत अच्छा स्रोत भी बन गया है।

देखिए हमने अभी रेवती से काफी बातें सुनीं और वंदना जी को सुना कि कैसे इस योजना के तहत कौशल विकास, स्किल ट्रेनिंग से उन्हें मदद मिली। ट्रेनिंग से क्या बदलाव आता है। ये उसके उदाहरण हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिये ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि देश के युवा अपनी आशा,आकांक्षा के अनुरूप आगे बढ़ सकें। स्किल ट्रेनिंग से लोगों के लिये रोजगार के नये अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। और लोगों के जीवन में इससे सकारात्मक बदलाव आ रहा है। देश के प्रत्येक ज़िले में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया गया है,ताकि युवाओं को ट्रेनिंग की सुविधा उन्हें अपने घर के पास ही मिल सके। यहां गांव के युवाओं को आर्थिक क्रियाकलापों को शुरू करने के लिये प्रशिक्षण दिया जाता है। इस साल मई तक करीब – करीब 600 ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान देश में काम कर रहे हैं। इसके तहत करीब-करीब 28 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गयी है। और उसमें से 19-20 लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। अभी हमनें मध्य प्रदेश से सुधा बघेल जी को भी सुना। जो सेनेट्री नेपकीन्स के पैकेजिंग का काम करती हैं। मध्यप्रदेश में सेनेट्री पैड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बनाए गए हैं,जो 35 जिलों में कार्यरत है। सेल्फ हैल्प ग्रुप के साढ़े पांच हजार से अधिक सदस्य इस काम को कर रहे हैं। मध्य प्रदेश से एक और उदाहरण मैं आपको बताऊं। वहां करीब 500 आजीविका फ्रेश स्टोर्स खोले गए हैं। जहां हर वर्ष एक टन से अधिक आजीविका मसालों की बिक्री होती है। एक तरह से वहां आजीविका एक ब्रांड बन गया है। अभी हमने रेखा जी से बात कि और जाना की कैसे सेल्फ हैल्प ग्रुप के माध्यम से एक प्रयोग बैंकिंग के क्षेत्र में किया गया है। गांव या दूर दराज के क्षेत्रों तक बैंकिंग या वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के लिये सेल्फ हैल्प ग्रुप के सदस्य को बैंक मित्र के रूप में बैंक सखी के रूप में नियुक्‍त किया गया है। आज करीब 2000 सेल्फ हैल्प ग्रुप्स देश भर में बैंक मित्र या बैंक सखी बैंकिंग सहायक के रूप में काम कर रहा है। मुझे बताया गया कि इससे करीब साढ़े तीन सौ करोड़ का लेनदेन हुआ है।

देखिये कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में कैसे काम होता है, आपको मालूम ही है कि कई महिलाएं ऐसी हैं,जो इस कार्य से बहुत समय से जुड़ी हुई हैं। वो इस कार्यक्रम को खुद तो चलाती हैं साथ ही कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में नये गांवों में भी जाकर वहां की महिलाओं को इसके लिये प्रेरित करती हैं। अभी तक 2 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन द्वारा इस कार्यक्रम को पूरे देश में आगे बढ़ाया जा रहा है और ये संख्या दिन प्रतिदिन और बढ़ रही है। दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सरकारी अनुदान के अलावा बैंकों द्वारा ऋण दिलाये जाने का भी प्रावधान है। बैंकों से मिलने वाले लोन से लोगों को व्यवसाय को बढ़ाने में काफी लाभ मिलता है। साथ में एक बात जो आप सभी को अच्छी लगेगी कि लोन का वापस भुगतान यानि रिपैमेंट में भी समय पर किया जा रहा है।
और मैंने देखा है कि कभी भी ये सेल्फ हैल्प ग्रुप के पैसे पहुंचने में कभी बैंक को देर नहीं आई। करीब करीब 99 पर्सेंट पैसे वापस आ गए। ये हमारे गरीब परिवार के संस्कार होते हैं। गरीबों की अमीरी है,जिसमें ये ताकत है। अभी हमने लक्ष्मी जी से सुना कि कैसे और उनके साथ तीस अन्य महिलाएं पापड़,अपना प्रोडक्ट बेच कर कैसे मुनाफा कमा रही हैं। यहां मैं आपको बताना चाहूंगा कि आज इस विशेष पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि सेल्फ हैल्प ग्रुप के उत्पाद सही दामों पर बिके। उनके लिये अच्छे बाजार उपलब्ध हों। इसके लिये भारत सरकार हर राज्य में प्रति वर्ष दो सरस मेलों के आयोजन के लिये अनुदान देती है। इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। हर वर्ष सेल्फ हैल्प ग्रुप के उत्पादों की मांग बढ़ रही है। जिससे उनके आय में भी वृद्धि हो रही है। इसके अलावा सेल्फ हैल्प ग्रुप्स को जेम (जी ई एम) यानी गवर्मेंट ई मार्केट से भी लाभ मिल रहा है। पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ाना और उसको बढ़ावा देने के लिये सरकार डीजिटल तरीके से सामानों की खरीद बिक्री को बढ़ावा देगी। सरकार में अब इसी के जरिये टैंडर दिये जा रहे हैं और सरकारी सामान की खरीदी हो रही है। और इसके लिये मैं सभी सेल्फ हैल्प ग्रुप की बहनें जो आप कुछ न कुछ उत्पाद करती हैं कुछ न कुछ प्रोडक्ट करती हैं,आप ये सरकार को जो पोर्टल है जीईएम उसमें जाकर के अपने आपको रजिस्टर करवा दीजिए,ताकि आप भी अगर सरकार को किसी चीज की जरूरत हो उसकी जानकारी आ जाए तो आप भी कह सकती है कि आप भी प्रोवाइड कर सकती हो और सरकार खरीदती है इन चीजों को।

देखिए अगर वो भेंड़ पालते हैं और ऊन बेचते हैं, तो मैं एक सुझाव देता हूं आपको। मैं जब गुजरात में था, तो मैंने एक छोटा प्रयोग किया और उस प्रयोग का ये जो भेंड़, बकरी चराने वाले और छोटे-छोटे काम करने वाले लोग थे, तो आपने देखा होगा आजकल ये बड़े – बड़े सैलून होते हैं, वहां जो हजामत करने वाले लोग होते हैं,वो एक मशीन होती है ट्रिमर हमलोग जो दाढ़ी को ठीक करते हैं ट्रिमर उपयोग करते हैं, तो मैंने ऐसे ट्रिमर इन भेंड़ चराने वालों को दिया,और मैंने कहा कि आप कैंची से जो बाल काटते हैं भेंड़ के तो उसके ऊन के टुकड़े हो जाते हैं,तो आपको कमाई कम होगी। आप ये ट्रिमर से मशीन से काटिए तो लंबे तार वाला ऊन मिलेगा। आप हैरान हो जाएंगे उसके कारण मेहनत भी कम हो गई। उस भेंड़ को तकलीफ होती थी वो भी कम हो गई। और लंबे धागे के ऊन मिलने लगे उनको मार्केट में अच्छा मिलने लगा। आपके यहां जो बहनें हैं। उनको ये अगर ट्रेनिंग करवा लेती हैं, तो ये आपके यहां तो ऊनी चीजों गर्म कपड़ों का काफी काम है, अच्छे धागे बन सकते हैं, तो बहुत बड़ी कमाई हो सकती है,तो आप जरूर वहां इस दिशा में सोचिए कुपवाड़ा इलाके में जो पहले मैंने देखा है कि इस काम को काफी ताकत थी और दूध के क्षेत्र में भी आपके इलाके में भी काफी मदद मिलती थी।

आप लोगों की कहानियां आप लोगों के अनुभव मैं समझता हूं जो भी सुनेगा और अगर खुले मन से सुनेगा अच्छा सोचने की भूमिका से सुनेगा तो मैं जरूर मानता हूं। हमारे देश की माताओं बहनों की ताकत कितनी है थोड़ा सा भी सहारा मिल जाए तो कैसे अपनी दुनिया खड़ी कर सकती हैं। कैसे मिलजुलकर के काम कर सकते हैं। कैसे लीडरशिप दे सकते हैं। एक नए भारत की नींव रखने के लिये वो कैसा परीश्रम कर रहे हैं। मैं समझता हूं सुनने वाले हम सबके लिये इनकी एक –एक गाथा बहुत ही प्रेरक है। इससे देश को ताकत मिलती है। इससे हमारी हर महिला को कुछ नया करने का रास्ता मिलता है,उत्साह मिलता है। और निराशा फैलाने वालों की संख्या कम नहीं। बुराई फैलाने वालों की संख्या कम नहीं। लेकिन अच्छाई का रास्ता छोड़ना नहीं। परिश्रम करने वालों की पूजा करना छोड़ना नहीं। अपने बलबूते में देश को आगे बढ़ाना, अपने को आगे बढ़ाना, परिवार को आगे बढ़ाना, अपने बच्चों की पढ़ाई करना,कठिन जिंदगी से निकल कर जीना ये अपने आप में हर इंसान को निराशा से जूझने की ताकत देता है और देश की यही तो ताकत है। और इसलिये मुझे बहुत अच्छा लगा आप लोगों को सुनकर के उससे मुझे भी ऊर्जा मिली है। मुझे प्रेरणा मिली है और मुझे विश्वास है कि आज इस कार्यक्रम में आप लोगों ने जो बाते बताईं हैं। और मुझे विश्वास है कि आप में से बहुत लोग है जिनको कहना है। हर किसी की अपनी एक कथा है हर किसी का अपना अनुभव है। हर किसी ने मुसीबतों से रास्ता निकाला है और ये आपका काम है आपका परिश्रम है आपकी हिम्मत है। किसी को इसकी क्रेडिट नहीं जाती है सिर्फ आपको ही जाती है और इसलिये आप से बढ़कर के कोई प्रेरणा नहीं है। लेकिन जिन बातों को बहनों को बहुत कुछ कहना है वो कह नहीं पाए हैं, मैं चाहूंगा कि आप अपनी बात मुझ तक पहुंचाइए। मैं आपको सुनूंगा। और कभी जो मैं आप में से मेरी जो बात आपसे आई होगी मन की बात में भी कभी सुनाऊंगा। क्योंकि देश को इसी से प्रेरणा मिलती है। रोना धोना करने वाले करते रहते हैं। अच्छा करने वाले भी प्रेरणा देते हैं। अब उसको काम लेकर के आगे चलना है। तो मैं आपसे प्रार्थना करता हूं। आपके पास मोबाइल फोन का उपयोग करने की आदत लग गई होगी। अगर नहीं लगी है तो आपके यहां कॉमन सर्विस सेंटर होता है। आपने देखा होगा नरेन्द्र मोदी एप है। आप उस पर जाकर के आप अपने समूह की फोटो रखिए। आप अपने समूह की बहनों की इन्टरव्यु उसमें बोलकर के रखिए। क्या काम किया कैसे किया। कैसे मुसीबतों से आप निकले और क्या-क्या अच्छा काम किया है। ये सब आप उस पर डाल दीजिए। मैं इसको देखूंगा, पढ़ूंगा,सुनूंगा और आप उसमें डालोगे तो लोग भी देखेंगे और फिर मैं उसमें से दो चार बातें जब भी मुझे मन की बात में से समय निकलेगा मैं जरूर आपकी बातें दुनिया को बताऊंगा। आपने अपने लिये तो किया ही है, लेकिन आपने ऐसी करोड़ों करोड़ों बहनों को भी एक नई हिम्मत दी है,नया हौसला दिया है। अब तो कॉमन सर्विस सेंटर बहुत पॉपुलर हो चुके हैं। देश के तीन लाख गांव में कॉमन सर्विस सेंटर हैं। अब तो हमारी बेटियां ही कॉमन सर्विस सेंटर चला रही हैं। वहां जाकर के आप इस टैक्नॉलॉजी का उपयोग करके आपकी जो सफलता की गाथा है वो जरूर मुझे भेजिए सारा देश और दुनिया उसको देखेगी। कैसे-कैसे हमारे दूर-सुदूर गांव में रहने वाली बहनें भी कितना उत्तम काम कर रही हैं। कैसे-कैसे नए तरीके ढूंढ़ रही हैं। बहुत अच्छा लगा आज आप लोगों को मिलने का मौका मिला। आप इतनी बड़ी संख्या में आशीर्वाद देने के लिए आए। मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपको बहुत-बहुत बधाई है।

बहुत–बहुत धन्यवाद!
 Courtesy:pib.nic.in

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