Thursday, 14 December 2017

Excerpts from PM's address at inaugural session of 90th Annual General Meeting of FICCI

फिक्की के प्रेसिडेंट श्री पंकज आर. पटेल जी, भावी प्रेसिडेंट श्री रमेश सी शाह जी, सेक्रेटरी जनरल डॉक्टर संजय बारू जी, और यहां उपस्थित अन्य महानुभाव 

आप सभी आज अपने साल भर के कामकाज का लेखा-जोखा लेकर बैठे हैं। इस वर्ष फिक्की के 90 वर्ष भी हो रहे हैं। किसी भी संस्था के लिए ये बहुत गौरव का विषय है। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 

साथियों, 1927 के आसपास का ही समय था जब साइमन कमीशन का गठन किया गया। इसके खिलाफ जिस तरह भारतीय उद्योग जगत उस समय लामबंद हुआ, वो अपने आप में बहुत ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घटना थी। अपने हितों से ऊपर उठकर उद्योग जगत ने साइमन कमीशन के गठन के खिलाफ आवाज उठाई थी। जैसे उस समय भारतीय समाज का हर अंग राष्ट्र हित के लिए आगे आया, वैसे ही भारतीय उद्यमियों ने भी अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाया। 

भाइयों और बहनों, जैसे 90 साल पहले सामान्य मानवी अपनी दैनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ देश की जिम्मेदारियों को उठाने के लिए आगे आया था, वैसा ही दौर अब फिर शुरू हुआ है। इस समय देश के लोगों की आशाएं-आकांक्षाएं जिस स्तर पर हैं, उसे आप समझ सकते हैं। लोग देश की इन आंतरिक बुराइयों से, भ्रष्टाचार से, कालेधन से परेशान हो चुके हैं, इनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। 

इसलिए आज हर संस्था चाहे वो कोई राजनीतिक दल हो, या फिर फिक्की जैसा औद्योगिक संगठन, उसके लिए ये मंथन का समय है कि वो देश की आवश्यकताओं और देश के लोगों की भावनाओं को समझते हुए अपनी भावी रणनीति बनाएं| 

साथियों, स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में देश में बहुत कुछ हुआ है, लेकिन ये भी सत्य है कि इन वर्षों में हमारे सामने कई चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। आजादी के बाद के 70 सालों में हमारे यहां एक ऐसा सिस्टम बना जिसमें कहीं ना कहीं, कोई ना कोई गरीब हमेशा इस सिस्टम से लड़ रहा था। बहुत छोटी-छोटी चीजों के लिए उसे संघर्ष करना पड़ रहा था। उस गरीब को बैंक अकाउंट खुलवाना है, तो सिस्टम आड़े आ जाता था, उसे गैस कनेक्शन चाहिए, तो दस जगह चक्कर लगाना पड़ता था। अपनी ही पेंशन पाने के लिए, स्कॉलरशिप पाने के लिए यहां-वहां कमीशन देना होता था। 

सिस्टम के साथ इस लड़ाई को बंद करने का काम मेरी सरकार कर रही है। हम एक ऐसे सिस्टम का निर्माण कर रहे हैं जो ना सिर्फ Transparent हो बल्कि Sensitive भी हो। एक ऐसा सिस्टम जो लोगों की आवश्यकताओं को समझे। 

इसलिए जब हमने जनधन योजना की शुरुआत की, तो उसे इतना शानदार response मिला। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि जब ये योजना शुरू हुई, तो हम ये लक्ष्य तय नहीं कर पाए थे कि कितने गरीबों के बैंक अकाउंट खोलने हैं। क्योंकि सरकार के पास ऐसा कोई डेटा था ही नहीं, कोई जानकारी थी ही नहीं। 

हमें बस ये ऐहसास था कि गरीब को बैंक के दरवाजे से लौटा दिया जाता है, कभी डांटकर, कभी तमाम कागजों का बहाना बनाकर। आज जब मैं देखता हूं कि जनधन योजना के माध्यम से 30 करोड़ से ज्यादा गरीबों ने अपने बैंक खाते खुलवाएं हैं, तो लगता है कि गरीबों की कितनी बड़ी आवश्यकता की पूर्ति हुई है। एक स्टडी में ये भी सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां ऐसे खाते ज्यादा खुले हैं, वहां Inflation दर में कमी आई है। यानि गरीब की जिंदगी कितना बड़ा बदलाव इस एक योजना से आया है। 

भाइयों और बहनों, हमारी सरकार ने लोगों की समस्याओं, उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाएं बनाईं हैं। लोगों की जिंदगी आसान बने, Ease of Living बढ़े, इस विजन को प्राथमिकता दी गई है। 

गरीब महिलाओं को गैस के धुएं से मुक्ति मिले, इसलिए उज्जवला योजना शुरू की थी। हमने तीन करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया है। अब एक और स्टडी में सामने आया है कि इस योजना के बाद ग्रामीण इलाकों में fuel inflation में भी कमी आई है। यानि गरीब को ईंधन के लिए अब कम पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। 

हम गरीब की एक-एक आवश्यकता, एक-एक समस्या को पकड़ कर उसे सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं। गरीब महिलाओं को लगातार शर्मिंदगी का सामना ना करना पड़े, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर असर ना हो, इसलिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत 5 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनवाए गए। 

गरीबों को रहने के लिए पक्के घर मिल सकें, वो जितना किराए पर खर्च करते हैं, लगभग उतने में ही उनके पास अपना घर हो जाए, इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई। 

साथियों, विज्ञान भवन की इन चमचमाती लाइटों, इतनी सजावट, ये जो पूरा माहौल है, उससे बहुत अलग दुनिया आपको देश के दूर-दराज के इलाकों, देश के गांवों में मिलेगी। मैं गरीबी की उसी दुनिया से निकलकर आपके बीच आया हूं। सीमित संसाधन, सीमित पढ़ाई, लेकिन सपने अथाह-असीमित। उसी दुनिया ने मुझे सिखाया है कि देश की आवश्यकताओं को समझते हुए, गरीबो की आवश्यकताओं को समझते हुए कार्य करो, फैसले लो, उन्हें लागू करो। 

जैसे मुद्रा योजना युवाओं की एक बहुत बड़ी आवश्यकता की पूर्ति कर रही है। ये आवश्यकता है बैंक गारंटी। कोई भी नौजवान अपने दम पर जैसे ही कुछ करना चाहता है, उसके सामने पहला सवाल यही होता है कि पैसे कहां से आएंगे। मुद्रा योजना के तहत ये गारंटी सरकार दे रही है। पिछले तीन वर्षों में करीब-करीब पौने 10 करोड़ लोन हमने स्वीकृत किए हैं। बिना बैंक गारंटी युवाओं को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए गए हैं। युवाओं की बहुत बड़ी जरूरत के साथ सरकार खड़ी है और इसी का परिणाम है कि देश को पिछले तीन साल में लगभग तीन करोड़ नए आंत्रप्रन्योर्स मिले हैं। 

ये वो लोग हैं जिन्होंने मुद्रा योजना के तहत पहली बार बैंक से लोन लिया है। इन तीन करोड़ लोगों ने देश के लघु उद्योग सेक्टर, या MSME सेक्टर का दायरा और बढ़ाया है, उसे मजबूत किया है। 

सरकार सरकार स्टार्ट अप्स को भी बढ़ावा दे रही है। स्टार्ट अप्स की सबसे बड़ी जरूरत है रिस्क कैपिटल की। इस जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने सिड्बी के तहत एक Fund of Fund बनाया। इस कदम के बाद सिड्बी के द्वारा किए गए निवेश को, अन्य इन्वेस्टर्स के सहयोग से, चार से साढ़े चार गुना ज्यादा लेवरेज किया गया। इससे स्टार्ट अप्स को, जिनके पास नए आइडियाज हैं, उन्हें पूंजी मिलने में सहायता मिल रही है। 

भाइयों और बहनों, स्टार्ट अप्स के इको सिस्टम में Alternate Investment Funds द्वारा किए गए निवेश महत्वपूर्ण हैं। पिछले तीन सालों में सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों के कारण ऐसे निवेश में काफी ज्यादा वृद्धि हुई है आप देखेंगे कि सरकार देश के नौजवानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रही है, योजनाएं बना रही है। इसका बिल्कुल contrast आपको पिछली सरकार में देखने को मिलेगा। उस दौरान कुछ बड़े उद्योगपतियों को लाखों करोड़ के लोन दिए गए, बैंकों पर दबाव डालकर पैसा दिलवाया गया। 

साथियों, फिक्की का अपने बारे में कहना है- industry’s voice for policy change. आप इंडस्ट्री की voice सरकार तक पहुंचाते हैं। आपके सर्वे आते रहते हैं, सेमीनार चलते रहते हैं। मुझे जानकारी नहीं है कि पहले की सरकार की नीतियों ने जिस तरह बैंकिंग सेक्टर की दुर्दशा की, उस पर फिक्की ने कोई सर्वे किया है या नहीं? ये आजकल Non-Performing Asset, NPA-NPA का जो हल्ला मच रहा है, वो पहले की सरकार में बैठे अर्थशास्त्रियों की, इस सरकार को दी गई सबसे बड़ी Liability है। 

मेरी दिलचस्पी ये भी जानने में है कि जब सरकार में बैठे कुछ लोगों द्वारा बैंकों पर दबाव डालकर कुछ विशेष उद्योगपतियों को लोन दिलवाया जा रहा था, तब फिक्की जैसी संस्थाएं क्या कर रही थीं? पहले की सरकार में बैठे लोग जानते थे, बैंक भी जानते थे, उद्योग जगत भी जानता था, बाजार से जुड़ी संस्थाएं भी जानती थीं कि ये गलत हो रहा है। 

ये यूपीए सरकार का सबसे बड़ा घोटाला था। कॉमनवेल्थ, 2 जी, कोयला, इन सभी से कहीं ज्यादा बड़ा घोटाला। ये एक तरह से सरकार में बैठे लोगों द्वारा उद्योगपतियों के माध्यम से जनता की गाढ़ी कमाई की लूट थी। क्या एक बार भी किसी सर्वे में, किसी स्टडी में इस तरफ इशारा किया गया। जो लोग मौन रहकर सब कुछ देखते रहे, क्या उन्हें जगाने की कोशिश, किसी संस्था द्वारा की गई? 

साथियों, बैंकिंग सिस्टम की इस दुर्दशा को ठीक करने के लिए, बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। बैंकों का हित सुरक्षित होगा, ग्राहकों का हित सुरक्षित होगा, तभी देश का हित भी सुरक्षित रहेगा। 

ऐसे में फिक्की जैसी संस्थाओं की बड़ी भूमिका, सही जानकारी के साथ उद्योग जगत और लोगों को जागरूक करने की भी है। अब जैसे बीते कुछ दिनों से फाइनेन्शियल रीजॉलूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल- FRDI को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। 

सरकार ग्राहकों के हित सुरक्षित करने के लिए, बैंकों में जमा उनकी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रही है, लेकिन खबरें इसके ठीक उलट चलाई जा रही हैं। उद्योग जगत को और आम नागरिकों को भ्रमित करने वाली ऐसी कोशिशों को नाकाम करने में फिक्की जैसी संस्था का भी योगदान बहुत जरूरी है। 

आप Government की Voice, Industry की Voice और Public की Voice के साथ तालमेल कैसे बिठाएंगे, ये भी आपको सोचना होगा। ये तालमेल क्यों आवश्यक है, इसका एक और उदाहरण दूंगा। 

साथियों, भारतीय industry की पुरानी मांग थी कि उसे GST चाहिए, GST चाहिए। अब जब GST लागू हो चुका है, तो उसे और प्रभावी बनाने के लिए आपकी संस्था क्या भूमिका निभा रही है? जो लोग सोशल मीडिया पर हैं, उन्होंने ध्यान दिया होगा कि बहुत दिनों तक , लोग रेस्त्रां के बिल पोस्ट कर रहे थे कि टैक्स भले कम हो गया लेकिन कुछ रेस्त्रांवालों ने मूल लागत बढ़ाकर फिर हिसाब बराबर कर दिया है। यानि ग्राहक तक वो फायदा पहुंचा ही नहीं, जो पहुंचना चाहिए था। 

ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार अपनी तरफ से कोशिश कर रही है लेकिन क्या फिक्की की तरफ से लोगों में, व्यापारियों में किसी तरह की जागरूकता लाने का प्रयास हुआ? 

भाइयों और बहनों, GST जैसी व्यवस्थाएं रातों-रात नहीं खड़ी होती। और हम तो पिछले 70 साल की बनाई हुई व्यवस्था को बदल रहे हैं। हमारा ये भी लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा व्यापारी इस व्यवस्था से जुड़ें। 

चाहे लाख रुपए महीने का टर्नओवर हो या दस लाख का, छोटे से छोटे व्यापारी को हम फॉर्मल सिस्टम में लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए नहीं कि सरकार को पैसा कमाना है, टैक्स वसूलना है। सरकार ये सब इसलिए कर रही है क्योंकि सिस्टम जितना फॉर्मल होगा, जितना पारदर्शी होगा, उतना ही गरीबों का लाभ होगा। इसके अलावा फॉर्मल सिस्टम की वजह से उन्हें आसानी से बैंकों से क्रेडिट मिलेगा, रॉ मैटेरियल की गुणवत्ता बढ़ेगी और लॉजीस्टिक्स की कॉस्ट भी घटेगी। यानि ग्लोबल बिजनेस में छोटे उद्यमी भी ज्यादा कंपटीटिव होंगे। मुझे उम्मीद है कि फिक्की ने बड़े पैमाने पर छोटे व्यापारियों के मार्गदर्शन के लिए कोई योजना अवश्य बना रखी होगी। 

भाइयों और बहनों, मुझे बताया गया है कि फिक्की के MSME वर्टिकल का गठन 2013 में किया गया था। 90 साल की इस संस्था में MSME वर्टिकल सिर्फ चार साल पहले बना !!! मैं कुछ और टिप्पणी तो नहीं करूंगा लेकिन इतना अवश्य चाहूंगा कि आपका ये वर्टिकल मुद्रा योजना, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया जैसी योजनाओं का प्रसार बढ़ाने में और मदद करे। इतनी अनुभवी संस्था जब हमारे छोटे उद्योगों की Hand Holding करेगी, तो वो भी और ज्यादा ऊर्जा के साथ काम कर पाएंगे। 

सरकार ने गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस- यानि GeM नाम से जो व्यवस्था खड़ी की है, उससे भी देश के छोटे उद्यमियों को जोड़ने में आपको अपने प्रयास बढ़ाने होंगे। GeM के माध्यम से अब छोटे-छोटे मैन्यूफैक्चरर भी अपना सामान सरकार को बेच सकते हैं। 

मेरी एक और अपेक्षा आपसे है कि MSME का जो पैसा बड़ी कंपनियों पर Due रहता है, वो समय पर चुकाया जाए, इसके लिए भी कुछ करिए। नियम है लेकिन ये भी सच है कि छोटे उद्यमियों का पैसा ज्यादातर बड़ी कंपनियों के पास अटका रहता है। तीन महीने, चार महीने बाद उन्हें पेमेंट मिलता है। कारोबारी रिश्ते ना बिगड़ जाएं इसलिए छोटा उद्यमी अपने पैसे मांगने में भी हिचकिचाता है। उसकी इस चिंता को, इस समस्या को दूर करने के लिए भी आपकी तरफ से प्रयास किया जाना चाहिए। 

साथियों, ऐसी बहुत सी वजहें थीं जिनकी वजह से हमारा देश पिछली शताब्दी में औद्योगिक क्रांति का पूरी तरह लाभ नहीं उठा पाया। आज बहुत सी वजहें हैं, जिसकी वजह से भारत एक नई क्रांति की शुरुआत कर सकता है। 

ये सरकार देश की आवश्यकताओं को समझते हुए नई नीतियां बना रही है। पुराने कानून खत्म कर रही है, नए कानून बना रही है। 

अभी हाल ही में हमने बांस को लेकर भी एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। बांस पेड़ है या नहीं है, इसे लेकर हमारे यहां दो अलग-अलग कानून थे। अब सरकार ने तय कर दिया है कि जंगलों से बाहर जो बांस उगता है, उसे पेड़ नहीं माना जाएगा। इस फैसले से उन लाखों छोटे उद्यमियों का फायदा होगा, जो बांस पर आधारित उद्योग से जुड़े हुए हैं। 

साथियों, मुझे बताया गया है कि फिक्की के सदस्यों में सबसे ज्यादा मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों से जुड़े सदस्य हैं। Engineering goods, Infrastructure, Real estate construction materials जैसी कंपनियां फिक्की का एक चौथाई परिवार है। भाइयों और बहनों, फिर क्यों ऐसा हुआ कि बिल्डरों की मनमानी की खबर पहले की सरकार तक नहीं पहुंची। मध्यम वर्ग पिस रहा था, जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को देने के बाद भी उसे घर नहीं मिल रहे थे, और फिर भी कुछ ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे थे। क्यों? RERA जैसे कानून पहले भी तो बनाए जा सकते थे, लेकिन नहीं बने। मध्यम वर्ग की इस दिक्कत को इस सरकार ने ही समझा और कानून बनाकर बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगाई। 

भाइयों और बहनों, हमने ही इस बात को समझा कि मार्च में बजट पेश होने पर योजनाओं को साल भर काम करने का अवसर नहीं मिल पाता। मॉनसून की वजह से तीन-चार महीने बर्बाद हो जाते हैं। इसलिए इस साल बजट का समय एक महीना पहले कर दिया गया। इसका परिणाम ये हुआ है कि इस साल विभागों को तय समय पर पैसा मिला और योजनाओं पर काम करने के लिए पूरा एक वर्ष। 

साथियों, इस सरकार में यूरिया को लेकर नई पॉलिसी बनी, टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर नई पॉलिसी बनी, एविएशन सेक्टर के लिए पॉलिसी बनी, ट्रांसपोर्ट सेक्टर के इंटीग्रेशन को लेकर पॉलिसी बनी, हेल्थ को लेकर नई पॉलिसी बनी। और सिर्फ ऐसा नहीं है कि पॉलिसी बनानी है, तो प़ॉलिसी बनाई जा रही है। 

हमने यूरिया को लेकर नीति बदली, तो देश में बिना नए यूरिया कारखाने लगे, 18 से 20 लाख टन यूरिया का उत्पादन बढ़ गया। टेक्सटाइल सेक्टर में नई नीति रोजगार के एक करोड़ अवसरों का निर्माण करेगी। एविएशन सेक्टर में पॉलिसी चेंज हवाई चप्पल वालों को भी हवाई उड़ान की सुविधा देगा। ट्रांसपोर्ट सेक्टर का इंटीग्रेशन यातायात की अलग-अलग व्यवस्थाओं पर बोझ कम करेगा। 

पिछले तीन वर्षों में 21 सेक्टरों से जुड़े 87 महत्वपूर्ण Reform किए गए हैं। Defence सेक्टर, Construction सेक्टर, Financial Services, Food Processing, जैसे कितने ही सेक्टरों में बड़े बदलाव हुए हैं। इसी का नतीजा आपको अर्थव्यवस्था से जुड़े अलग-अलग पैरामीटर्स में नजर आ रहा है। 

Ease of Doing Business की रैंकिंग में भारत सिर्फ तीन वर्षों में 142 से 100वें नंबर पर पहुंच गया है। भारत का Foreign Exchange Reserve लगभग 30 हजार करोड़ डॉलर से बढ़कर 40 हजार करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया है। Global Competitiveness Index में भारत की रैंकिंग में 32 अंकों का सुधार हुआ है। Global Innovation Index में भारत की रैकिंग 21 अंक उछली है। Logistics Performance Index में 19 अंकों का सुधार हुआ है। अगर कुल FDI की बात करें तो पिछले तीन वर्षों में देश में विदेशी निवेश में लगभग 70 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। 

भाइयों और बहनों, फिक्की में तो कंस्ट्रक्शन सेक्टर से जुड़े सदस्य बहुत ज्यादा हैं। आपकी जानकारी होगी कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अब तक के Total विदेशी पूंजी निवेश का 75 प्रतिशत पिछले तीन वर्षों में ही हुआ है। 

इसी तरह एयर ट्रांसपोर्ट सेक्टर हो, माइनिंग सेक्टर हो, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर हो, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स हो, सभी में अब तक हुए निवेश का आधे से ज्यादा निवेश पिछले तीन वर्ष में ही हुआ है। 

अर्थव्यवस्था की मजबूती के कुछ और आंकड़े आपके सामने रखना चाहता हूं। मुझे उम्मीद है कि दो-तीन दिन पहले आए ये आंकड़े आपको पता होंगे, लेकिन इनकी तरफ आपका ध्यान फिर दिलाना चाहता हूं। 

साथियों, घरेलू बाजार में पैसेजेंर व्हीकल बिक्री की ग्रोथ नवंबर में 14 प्रतिशत से ज्यादा रही है। कॉमर्शियल व्हीकल की बिक्री, जो कि देश में इकॉनॉमिक एक्टिविटी को दर्शाती है, उसमें 50 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ हुई है। थ्री व्हीलर की बिक्री, जिसे रोजगार का भी एक इंडीकेटर माना जा सकता है, उसमें नवंबर महीने में लगभग 80 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है। टू-व्हीलर, जिसकी बिक्री गांवों में और मध्यम वर्ग की आय में बढोतरी को दर्शाती है, उसमें 23 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। 

साथियों, आपको पता है कि इतने बड़े स्तर पर परिवर्तन तभी आता है जब अर्थव्यवस्था पर सामान्य मानवी का भरोसा बढ़ता है। ये सुधार इस बात का सबूत हैं कि बहुत ग्राउंड लेवल पर जाकर सरकार बड़े प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी कदम उठा रही है। ये सुधार इस बात का भी सबूत हैं कि सरकार के सोशल रीफॉर्म, इकॉनॉमिक रीफॉर्म भी अपने आप ला रहे हैं, Job Creation में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। 

जैसे मैं अगर प्रधानमंत्री आवास योजना की बात करूं तो सरकार इस लक्ष्य पर काम कर रही है कि 2022 तक देश के गरीब के पास अपना घर हो। इसके लिए गांवों में, शहरों में लाखों घरों का निर्माण किया जा रहा है। इन घरों को बनाने के लिए Manpower तो स्थानीय स्तर पर ही जुटाई जा रही है। घरों के निर्माण में जो सामान लग रहा है, वो भी तो स्थानीय बाजार से ही आ रहा है। ऐसे ही देश में गैस पाइपलाइन बिछाने का जो काम हो रहा है, उससे कई शहरों में सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम डवलप हो रहा है। जिन शहरों में CNG पहुंच रही है, वहां पर एक Job मार्केट में एक नया इकोसिस्टम बन रहा है। 

भाइयों और बहनों, हम सभी देश की आवश्यकताओं को समझते हुए कार्य करेंगे, तभी लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति भी होगी। फिक्की से जुड़ी सदस्य कंपनियों को इस बारे में भी विचार करना चाहिए कैसे हम उन चीजों का देश में निर्माण करें, जिन्हें भारत बाहर से मंगाने के लिए मजबूर है। कितने ही क्षेत्रों में हमसे ही कच्चा माल लेकर हम ही को वापस बेचा जाता है। इस स्थिति से हमें देश को बाहर निकालना है। 

साथियों, 2022 में हमारा देश अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष का पर्व मनाएगा। हम सभी ने संकल्प लिया है न्यू इंडिया के निर्माण का। फिक्की जैसी संस्थाओं का दायरा इतना बड़ा है, जिम्मेदारी इतनी बड़ी है, कि उसे आगे कदम बढ़ाकर, न्यू इंडिया के लिए नए संकल्प लेने होंगे। फिक्की को ये देखना होगा कि देश की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वो क्या नए संकल्प ले। आपके लिए कितने ही सेक्टर हैं जहां काम करने की बहुत संभावनाएं हैं। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर, स्टार्ट अप, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, सोलर पावर सेक्टर, हेल्थकेयर, इन सभी को फिक्की के अनुभव का फायदा मिल सकता है। क्या आपकी संस्था देश के MSME सेक्टर के लिए थिंक टैंक के तौर पर कार्य कर सकती है? 

भाइयों और बहनों, करने के लिए बहुत कुछ है, बस हमें संकल्प लेना है और उसे सिद्ध करना है। जब हमारे संकल्प सिद्ध होंगे तो देश भी सिद्ध होगा। हां, बस इस बात का ध्यान रखना है कि जैसे क्रिकेट में कुछ बल्लेबाज 90 पर आकर 100 के इंतजार में धीरे खेलने लगते हैं, वैसे फिक्की ना करे। उठिए, सीधे एक छक्का, एक चौका और सैकड़ा पार करें !!! 

मैं एक बार फिर फिक्की को, उसके सदस्यों को शुभकामनाओं के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद !!! 

Courtesy: pib.nic.in

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